Ahoi Ashtami Vrat 2022 Date: अहोई व्रत 17 को रखे या 18 को

अहोई अष्टमी कब है (Ahoi Ashtami Vrat 2022 Date) अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त, अहोई व्रत पूजन विधि (Ahoi Ashtami 2022 Vrat Shubh Muhurat, Ahoi Vrat in Hindi)

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हम हिन्दु कई प्रकार के पर्व मानते है कोई पर्व त्याग से सम्बन्ध रखता है तो कोई रंगों से तो कोई किसी के घर आने की वापसी पर दीप जलने से संबंधित है। लेकिन कुछ भारतीय त्यौहार ऐसे है जिनमे लोग व्रत रखते है। और यह भी कहा जाता है कि ऐसे व्रतों का फल बहुत ही सुभकारी होता है। ऐसे ही कुछ व्रत वाले त्यौहार है – नवरात्रि, करवा चौथ का व्रत, तथा अहोई का व्रत आदि। आज हम अहोई के व्रत की बात करने वाले है। आइये जानते है अहोई क्या है तथा अहोई क्यों मनाई जाती है?

अहोई क्या होती है? (Ahoi Vrat in Hindi)

अहोई अष्टमी एक त्यौहार होता है। इस त्यौहार के दिन पुत्रवती महिलाएं अपने पुत्र के मंगल के लिए यह व्रत अवश्य रखती हैं। अहोई का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन होता है। इस दिन सभी माताए अपने बच्चों की दीर्घायु की कामना करते हुए पूरे दिन उपवास रखती है और शाम के समय तारे निकलने के समय पूजन विधि करती हैं।

पहले समय में होई गेरू बनाई जाती थी और उन्हें पूजा के स्थान पर दीवार पर टांग दिया जाता था लेकिन आज के समय में सभी बाजार से अहोई का कैलेंडर लाते हैं और उसी से सभी माताएं अपनी पूजा संपन्न करती हैं जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके पुत्र हमेशा कीर्तिमान रहते है ।

अहोई अष्टमी पूजा का महत्व (Importance of Ahoi Ashtami Vrat in Hindi)

अहोई अष्टमी पूजा का हमारे हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व है क्योंकि इस व्रत में माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। और यदि माता पार्वती माताओं की उपासना से प्रसन्न होती हैं तो वह अपनी कृपा दृष्टि उनकी संतानों पर बनाए रखती है।यह व्रत महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है। इस व्रत को सभी महिलाएं बहुत ही रीति रिवाज और श्रद्धा के साथ पूर्ण करती हैं। और अपनी संतान के कल्याण के बारे में कामना करती है।

और माना जाता है कि जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनकी संतानों का जीवन सुख समृद्धि से परिपूर्ण रहता है व उनकी आयु लंबी होती है और वे अपने जीवन में यश और कीर्ति को प्राप्त करते हैं। इस व्रत को संपन्न तभी माना जाता है जब साय काल के बाद तारे निकलने के समय, तारों को देख कर अर्ध दिया जाता है।

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अहोई व्रत कौन रखता है ? या क्यों रखा जाता है? (Ahoi Ashtami Vrat)

अहोई का व्रत करवा चौथ के बाद आता है। इसमें माता पार्वती को अहोई माता के रूप में पूजा जाता है। इस व्रत को वे सभी माताएं रखती हैं जो पुत्रवती होती हैं। वो माताएं इस व्रत को अपने पुत्रों के सुखमय जीवन और लंबी आयु की कामना से रखती है।यह व्रत कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में रखा जाता है इसी कारण से इस व्रत को अहोई अष्टमी नाम से जाना जाता है।

अहोई अष्टमी का व्रत कैसे किया जाता है? (How to Celebrate)

हमारे हिंदू धर्म में सभी व्रत को करने का अपना एक अलग तरीका होता है और उसी विधि के अनुसार व्रत को संपन्न किया जाता है। इसीलिए हम आपको इस व्रत को करने का तरीका बताते हैं –

  • इस बात में सबसे पहले सवेरे उठकर स्नान करने के बाद नए कपड़े पहने जाते हैं और पूजा के स्थान पर दीवार पर अहोई माता की तस्वीर बनाई जाती है या कैलेंडर भी लगा सकते हैं।
  • चावल, रोली और फूलों से माता की पूजा करनी चाहिए।
  • इसके बाद एक कलश में जल भरकर पूजा वाले स्थान पर रखें और अहोई माता की कथा को सुनें या कहें।
  • पूजा संपन्न होने के बाद जो प्रसाद बनाया होता है जैसे- हलवा पूरी या खीर आदि का भोग माता अहोई को लगाया जाता है।

अहोई अष्टमी का व्रत करने से क्या होता है?

पहले समय में अहोई अष्टमी का व्रत पुत्रवती माताएं अपने पुत्रों के सुख समृद्धि की कामना से रखती थी लेकिन वर्तमान में यह व्रत सभी संतानों के मंगल जीवन की कामना से रखा जाता है और सभी माताए इस व्रत को रखते हुए यह कामना करती हैं कि उनकी संतानों की आयु लंबी हो और उनकी सभी संताने अपने जीवन में उन्नति पाए।

2022 में अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Vrat 2022 Date)

Ahoi Ashtami Vrat 2022 Date in Hindi: इस वर्ष अहोई का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में 17 अक्टूबर को प्राम्भ होकर 18 अक्टूबर तक रहेगा। लेकिन धार्मिक पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत सभी को 17 अक्टूबर सोमवार को ही रखना चाहिए। मतलब अहोई 17 अक्टूबर को सोमवार को मनाई जाएगी।

अहोई अष्टमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

अहोई अष्टमी के व्रत में बहुत सी बातें ध्यान रखनी चाहिए। इस व्रत को बहुत ही श्रद्धा के साथ पूर्ण करना होता है। कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जिनको इस पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं –

  • इस व्रत में जो चीजें या सामग्री आप पहले इस्तेमाल कर चुके हैं उन्हें इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • इसके अतिरिक्त मुरझाए हुए फूल और पहले प्रयोग की हुई मिठाई को पूजा में नहीं रखना चाहिए।
  • इस दिन महिलाओं को किसी भी नुकीली चीज का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • अहोई अष्टमी व्रत के दिन माताओं को भूमि में किसी भी प्रकार की खुदाई नहीं करनी चाहिए।
  • इस व्रत के दिन महिलाओं को किसी भी जानवर को सताना नहीं चाहिए।
  • इस व्रत में दूध से बने किसी भी खाद्य सामग्री का सेवन नहीं करना चाहिए।

अहोई अष्टमी के व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं।

इस व्रत को करवा चौथ व्रत के समान ही मनाया जाता है। जिस तरह महिलाएं करवा चौथ में पूरे दिन निर्जल उपवास रखती है उसी तरह अहोई अष्टमी के व्रत में भी पूरे दिन निर्जल उपवास किया जाता है और व्रत के पूर्ण होने के बाद ही माताएं पानी या भोजन ग्रहण कर सकती हैं।

अहोई अष्टमी के व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए? (Food)

सबसे पहले जानते है अहोई अष्टमी के व्रत में क्या खा सकते हैं? –

  • अहोई का व्रत बहुत ही पारंपरिक तरीके से किया जाता है इसलिए खानपान पर आवश्यक ध्यान दिया जाता है।
  • इस दिन अधिकतर महिलाये निर्जल मतलब बिना पानी पीये ही व्रत रखती है।
  • यदि आप बिना जल का सेवन किये नहीं रह सकती तो आप जल पी सकती है।
  • अहोई अष्टमी का व्रत पूर्ण हो जाने के बाद आप घर पर बनान भोजन ग्रहण कर सकती है।
  • व्रत के पूजन के बाद आप पानी पी सकती है तथा फलों आदि का सेवन कर सकती है।

आइये अब जानते है अहोई अष्टमी के व्रत में क्या नहीं खा सकते हैं?

  • बहुत सी माताएं अहोई व्रत बिना जल ग्रहण किये भी करती हैं।
  • अहोई अष्टमी के व्रत पूर्ण जाने तक दूध से बने पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अहोई पूजा समाप्ति तक माताओं को किसी भी प्रकार के अनाज को नहीं खाना चाहिए।
  • यदि आप पूरी दिन भूखे नहीं रह सकती तो फल का सेवन कर सकती है। लेकिन फल बसी नहीं होने चाहिए। अहोई माता को फल का भोग लगाकर ही सेवन करे।

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अहोई पूजा की सामग्री और अहोई व्रत पूजन विधि (Ahoi Vrat Pujan Vidhi 2022)

अहोई पूजा को करने के लिए कुछ सामग्री की जरूरत होती है जैसे –

  • एक चांदी की अहोई,
  • चांदी की मोती की माला
  • जल से भरा हुआ कलश,
  • दूध
  • चावल
  • हलवा
  • दीपक
  • रोली
  • ताजा फूल
  • गेहूं आदि चीजों की आवश्यकता होती है।

इस पूजा में चांदी की अहोई को चांदी की माला में डालकर, कथा को सुनने के बाद गले में पहना जाता है।

और यह कथा शाम के समय प्रारंभ होती है।

अहोई माता को रोली , फूल, हलवा अर्पित करते हैं और हाथ में गेहूं के कुछ दाने लेकर और कुछ दक्षिणा लेकर अहोई माता की कथा सुनते हैं।

कथा सुनने के बाद माला को गले में पहन लेते हैं और गेहूं के दाने और दक्षिणा सासु मां को देकर आशीर्वाद लेते हैं। और उसके बाद चांद और तारों को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करते हैं।

इस माला को गले में दिवाली आने तक पहने रखते हैं और दिवाली के दिन जल के छींटे देकर वापस सुरक्षित रख देते हैं।

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FAQ (सवाल-जबाब)

सवाल – अहोई अष्टमी का व्रत करने से क्या होता है?

जबाब – अहोई का व्रत करने संतान को अच्छे सुख की प्राप्ति होती है, उन्हें दीर्घ आयु प्राप्त होती तथा सेहत में भी तरक्की मिलती हैं।

सवाल – अहोई व्रत किसके लिए किया जाता है?

जबाब – अहोई का व्रत माता अपने पुत्र के लिए करती है। ऐसी महिला जिनकी कोई संतान नहीं है वह भी संतान प्राप्ति के लिए इस व्रत को रख सकती हैं।

सवाल – अहोई अष्टमी का व्रत कब से शुरू होता हैं?

जबाब – अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी की सुबह से शुरू होकर शाम तक पूजन विधि की समाप्ति तक होता हैं।

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