बोनसाई पौधे क्या है, जापान व चीन में है इनका क्रेज | Bonsai in Hindi

बोनसाई क्या है (Bonsai in Hindi) बोनसाई बनाने की विधि, देखभाल कैसे करे व कहाँ से ख़रीदे (Bonsai Meaning in Hindi, How to Grow and Buy Bonsai)

आखिर ऐसा कौन व्यक्ति होगा जिसे पेड़ पसंद न हो, पेड़ो की शीतल छाया पसंद न हो तथा पेड़ो के फल पसंद न हो। हम सभी जीवन, खान-पान और आराम के मामले पेड़-पौधों पर पूरी तरह आश्रित हैं। हम में से कई लोगो का खुद का बगीचा होगा, जिसमे फलो व फूलो वाले पेड़ लगे होंगे। आपके घर के अन्दर भी गमलो में पेड़ लगे होंगे घर की सुन्दरता बढ़ाने के लिए।

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बोनसाई क्या है – Bonsai in Hindi

क्या हो अगर आम, पीपल, अमरुद जैसे बड़े वृक्षों को आप अपने घर के अन्दर एक छोटे से गमले में लगाये, वो दिखे तो बिल्कुल विशाल वृक्षों की तरह लेकिन हो पुरी तरह से छोटे। ऐसे पेड़ो से हमारा घर कितना सुन्दर लगेगा ना। बोनसाई पेड़ो से आप विशाल वृक्षों जैसे दिखने वाले लघु पौधों को घर में लगाकर घर की ख़ूबसूरती में चार-चाँद लगा सकते हैं। आइये जानते है बोनसाई क्या है(Bonsai in Hindi) जापान के लोग इन्हें इतना पसंद क्यों करते है?

Table of Contents

बोनसाई क्या है (Bonsai in Hindi)

बोनसाई वो पेड़ होते है जिनकी उम्र तो 10,20,30, 50 वर्ष से भी अधिक हो सकती है लेकिन शायद उनकी लम्बाई आपके घर में गमले में लगे पौधे के जितनी भी ना हो। बोनसाई वैसे तो एक जापानी शब्द है लेकिन भारत में बोनसाई को लोग बौने पौधे या बोने पेड़ कहना अधिक पसंद करते हैं। वैसे तो पेड़ो को सदा बौने रखने की यह तकनीक हजार साल पहले चीन में विकसित की गयी थी लेकिन जापानी लोगो ने इस कला को जीवित रखा इसलिए इसे जापान की कला ही कहा जाता है। चीनी शब्द पेन्जाई को जापानी में बोनसाई कहा जाता है जिसका मतलब होता है बोने पात्र या छोटे बर्तन जिनमे बोनसाई पौधों को उगाया जाता है।

बोनसाई का इतिहास (History Of Bonsai in Hindi)

अगर बोनसाई के उदय की बात करे तो इसकी शुरुआत छटी शताब्दी से भी पहले चीन में हुई थी। उस समय चीन में पौधों को छोटा करने की कला को पेंजिंग के नाम से जाना जाता था। छटी शताब्दी से नोवी शताब्दी के बीच कई बोद्ध अनुयाई जापान से चीन गए थे जिन्होंने चीन में यह कला सीखी तथा वापस आकर जापान में इसे लोगो से अवगत कराया। बोनसाई का मतलब जापान में होता है पौधों को ट्रे में उगाना, क्योंकि पेंजिंग को ट्रे या इसी आकार के बर्तन में उगाया जाता था, इसलिए जापान में पेड़ो को बोना करने की कला को बोनसाई के नाम से जाने जाना लगा।

जैसे- जैसे 1950 के आस-पास उद्योगीकरण शुरू हुआ वैसे ही लोग एक देश से दुसरे देश में बहुत ज्यादा जाने लगे। जब यूरोप एवं अमेरिका के लोगो ने इस अभूतपूर्व कला को देखा तो उन्होंने भी इस कला को अपना लिया। और देखते ही देखते बोनसाई कला दुनिया भर में फैल गयी।

बोनसाई पेड़ो को उगाने की प्रक्रिया या बोनसाई बनाने की विधि (Cultivation of Bonsai in Hindi)

बोनसाई पेड़ो को उगाने की कई तकनीक है, बोनसाई को भिभिन्न तरीको से उगाया जा सकता हैं। आइये जानते है बोनसाई को अपने घर में ही उगाने के नए-नए तरीको के बारे में –

१. बीजो द्वारा उगाना

बोनसाई पौधों को उगाने की शुरुआत करने वाले लोगो में से अधिकतर बाजार से बीज खरीदकर इन पौधों को उगाते हैं। बोनसाई को बीजो द्वारा उगाना बिल्कुल ऐसा होता है जैसे माँ द्वारा बच्चे के जन्म से पहले ही सब चीजो का ख्याल रखना। आपको पोधो के मिट्टी से बाहर आने से पहले बीजो को हर जरुरत की चीज देनी होगी जो उनके लिए आवश्यक हैं। बीजो द्वारा बोनसाई उगाने वालो लोगों को धैर्य रखने की बहुत ज्यादा आवश्यकता है क्योंकि इनके उगने में बहुत समय लगने वाला हैं।

बीज खरीदने से पहले ध्यान रखने योग्य बाते –

  • बीज खरीदने से पहले हमे यह बात ध्यान रखनी जरूरी है कि “स्पेशल बोनसाई बीज” जैसी कोई चीज नहीं होती। बोनसाई उगाने के लिए बीज सामान्य ही होते है बस हमे उन बीजो से निकले पेड़ो को एक प्रक्रिया से गुजारना पड़ता है ताकि वो अधिक बड़े न हो
  • उन्ही बोनसाई के बीज ले, जो पेड़ आपके वातावरण में होते हैं यदि आपने ऐसे पेड़ो के बीज ले लिए जो आपके यहाँ की जलवायु के अनुकूल नहीं है तो उन्हें बड़ा करने में बहुत कठनाई होगी या वो उगेगे ही नहीं। मान लो आपके क्षेत्र में खजूर के पेड़ नहीं होते तो आपको इनके बीज लेने से भी बचना चाहिए।
  • कुछ बीज या पेड़ ऐसे होते है जो बरसात के मौसम में ज्यादा अच्छे से फलते-फूलते है और कुछ इस प्रकार के होते है जिन्हें सर्दियाँ अधिक भाती हैं। इसलिए याद रखे सर्दियों में वही बीज बोये जो इस समय के वातावरण के लिए अधिक अनुकूल है एवं बरसात और गर्मियों में उस समय की जलवायु के अनुसार।
  • आप बाजार से बीज न लाकर अपने घर के आस-पास लगे पेड़ो के बीज भी इक्कठा करके उनकी बुआई कर सकते है। इस तरह से इकठ्ठा बीजो की बुआई करने से पहले आपको यह देख लेना है कि कही बीज खराब तो नहीं है। यदि आपने खराब बीजो को बो दिया तो आपकी कई महीनो की मेहनत बेकार हो सकती हैं।

हमे अपने बीजो की बुआई कब करनी चाहिए?

वैसे तो बीजो को उनकी ऋतु के अनुसार ही बोना चाहिए, लेकिन हो सकता है आप यह सुनिश्चित न कर पा रहे हो कि कौन सा पेड़ किस मौसम में ज्यादा फलता-फूलता या जल्दी बढ़ता हैं। अगर आप ऐसे असमंजस में है तो आप अपने बीजो को सर्दिया खत्म होने के बाद मतलब मार्च महीने के आखिरी दिनों में या अप्रैल महीने में बुआई कर सकते हैं।

इस समय बीजो को बोने से फायदा यह होगा कि आगे आने वाला मौसम गर्मियों का होगा जो बीजो को मिट्टी में जल्दी अंकुरित होने में मदद करेगा। एवं गर्मियों के बाद बरसात का मौसम आएगा जो बीज से निकले पौधे को जल्दी बढ़ने में सहायता करेगा। सर्दियों में बोया बीज अधिक ठण्ड के कारण अंकुरित होने में समय ले सकता है या शायद अंकुरित न भी हो। यदि बीज में से पौधा निकल भी गया तो अधिक सर्दी होने पर उस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता हैं।

बीजो को कहा से लाये/ख़रीदे?

जैसे की हमने आपको ऊपर भी बताया है कि आप पतझड़ के मौसम में आपने आस-पास लगे पेड़ो से बीज इक्कट्ठा कर सकते हैं तथा इन बीजो की अपने गमलो में बुआई कर सकते हैं। परन्तु इन बीजों में यह देखना कि अच्छा कौन-सा है और खराब कौन-सा यह हर कोई नहीं कर सकता। यदि हमने ऐसे बीजो की बुआई कर दी जिनसे कभी पौधा ही ना निकले तो हमारा पूर्ण परिश्रम बेकार हो जायगा। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने आपके लिए नीचे एक लिंक दिया है जहाँ से आप अच्छे बीजों को अपने घर ही पा सकते हो

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२. पोधों को खरीद कर घर में उगाना/लगाना

यदि आपको बोनसाई के बारे में कोई भी अनुभव नहीं है तो आपके लिये सबसे अच्छा रहेगा कि आप पौधे को कही से खरीद कर लगाये। अगर बिना किसी पूर्वानुभव के आप बोनसाई के बीज उगाते है तो शायद आप बीजो के बढ़िया ढंग से फलने-फूलने के लिए देखभाल नहीं कर सके। पौधों की देखभाल करना, बीजो की देखभाल करने से कम आसान होता है क्योकि पौधा हमारी आँखों के सामने होता है जबकि बीज मिट्टी के नीचे। अधिक पानी देने से बीज बहुत जल्दी ख़राब भी हो सकता है, तथा समय पर खाद न देने से भी बीजो की प्रगति रूक सकती हैं। इसलिए अधिक जानकारी न होने पर बोनसाई को खरीद कर अपने घर या बगीचे में लगाना सबसे बेहतर विकल्प हैं।

कहाँ से खरीदे बोनसाई?

बोनसाई पेड़ आपको आपके ही समीप किसी पेड़ो की नर्सरी में मिल जायंगे, लेकिन उनकी गुणवत्ता का मापन करना कोई आसान काम नहीं हैं। यदि आपको किसी नर्सरी में बोनसाई की प्राप्ति नहीं होती तो आप इन्हें ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। ऑनलाइन खरीदते वक्त आप अपने अनुसार पेड़ का चुनाव कर सकते हैं। आप यहाँ से घर की हवा को शुद्ध करने वाला उल्मुस बोनसाई पेड़ खरीद सकते है

बोनसाई पेड़ खरीदने से पहले जानने योग्य आवश्यक बाते

बोनसाई पौधों को खरीदने से पहले इन बातो को जानना आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता हैं। आइये जानते कुछ विशेष बाते –

  • यदि आप पहली बार बोनसाई को उगा रहे है तो आपको इन पेड़ो की ऐसी प्रजाति कभी नहीं खरीदनी चाहिए जिसकी देखभाल करना कठिन हो। थोड़ी सी जाँच-पड़ताल करे एवं उसके बाद ही अपने पेड़ो के लालन-पोषण के अनुभव को ध्यान में रखकर ही सही पेड़ की प्रजाति ख़रीदे।
  • जब आप बोनसाई खरीद रहे है तो यह पता करना ना भूले कि आप कौन-सी प्रजाति ले रहे है। यदि हमे प्रजाति के बारे में अच्छी प्रकार से पता है तो हम उसके अनुसार खाद, मिट्टी तथा पानी की सही मात्रा उपलब्ध करा सकते हैं।
  • सबसे आवश्यक बात जो लोग भूल जाते हैं वह है आपके यहाँ की जलवायु। यदि आपने कोई ऐसा पेड़ क्रय कर लिया जो आपके क्षेत्र की जलवायु या वातावरण के अनुरूप नहीं है तो यह आपके लिए पेरशानी की बात हो सकती हैं। जलवायु के विरुद्ध लगा पौधा ना तो जल्दी से बड़ा होता हैं और न ही सही तरह का आकार प्राप्त कर पता हैं एवं हम बोनसाई को उसके प्यारे बौने आकार की बजह से ही तो क्रय करते हैं।
  • किसी भी पेड़ की जड़ व तना ऐसी चीज होती है जिन्हें मनचाहा आकार देना बड़ा मुश्किल हैं। छटाई करके व तारो से बाँधकर हम टहनियों को तो अपने पसंद की आक्रति दे सकते है लेकिन तने को नहीं। इसलिए आवश्यक है कि खरीदारी करते समय आप वैसा ही तना चुने जैसा आप पेड़ के बड़े होने पर देखना चाहते हैं। बीज से पौधा उगाने पर हमारा तने के आकार पर ज्यादा कण्ट्रोल नहीं रहता परन्तु बाजार से पेड़ खरीदते हुए यह सब हमारी इच्छा पर निर्भर हैं।

३. कंटाई करके पेड़ उगाना

यदि आपको बोनसाई उगाने के बारे में जानकारी है मतलब आपने इन पौधों को पहले उगाया है तो आपके लिए कटाई वाली यह तकनीक काफी अच्छी साबित हो सकती हैं। वैसे कटाई करके बिना अनुभव वाला व्यक्ति भी बोनसाई लगा सकता हैं बस थोड़ा प्रयास अधिक करना होगा। इस तकनीक से पौधा लगाने के लिए आपको एक ऐसे बोनसाई पौधे को चुनना है जिसकी टहनी मिट्टी में गाड़ने से वह पेड़ का रूप लेना शुरू कर दे।

ऐसे पेड़ को चुनने के बाद आपको 5 से 10 सेमी० की टहनी लेनी है व उसे नीचे से 45 डिग्री के आकार में काटना है। उस तिरछी या 45 डिग्री के कौन कटी टहनी को ट्रे के आकर के गमले में बढ़िया मिट्टी में 2-3 सेमी तक गाड़ देना है तथा थोड़ा जल भर देना हैं। सही खाद व जल की मात्रा देने के बाद आप देखेंगे कि कुछ सप्ताह में आपके द्वारा लगायी टहनी हरी होनी शुरू हो जाएगी।

कटाई करके बोनसाई पेड़ को उगाने के फायदे

कटाई करके बोनसाई उगने के अनेक लाभ है आइये जानते है उन लाभों के बारे में –

  • कटाई करके बोनसाई को लगाना इतना इसलिए अधिक पसंद किया जाता है क्योंकि इसमें बहुत कम या ना के बराबर खर्चा होता हैं। आप अपने ही बगीचे में लगे किसी बोनसाई ट्री की टहनी ले सकते हैं या फिर किसी नर्सरी में जाकर टहनी ला सकते हैं। यदि आप बोनसाई के बीज या पौधा लायेंगे तो आपको काफी पैसे देने होंगे जबकि किसी नर्सरी में जाकर बस पेड़ की एक टहनी लेने के कोई आपसे अधिक पैसे ले ही नहीं सकता
  • बोनसाई पेड़ो के बीजो को बाजार से लाकर बुआई करने में एक तो काफी समय लगता है और दूसरा बीजो से पेड़ के अंकुरित होने में काफी समय लगता हैं। यदि आप टहनी को लगाते है फिर ना तो आपको बाजार से बीज मंगवाने की जरुरत और ना ही आपको बीजो से पेड़ निकलने के जैसे बहुत समय तक प्रतीक्षा करनी होगी। बोनसाई की लगायी एक टहनी 2 से 4 सप्ताह में उगना शुरू हो जाती हैं।
  • हम टहनी के उगने को अपनी आँखों से प्रतिदिन देख सकते हैं यदि किसी कारणवश टहनी नहीं उग पाती तो हमारा परिश्रम बेकार नहीं जाता और ना ही हमे कोई नुकसान होता हैं। टहनी को उगाने के लिए मिट्टी को अधिकतर समय गीला रखना आवश्यक हैं इसलिए नमी ख़त्म होने पर गमले में जल डालते रहे।

बोनसाई पेड़ो की देखभाल (Care of Bonsai in Hindi)

क्योंकि हमे बोनसाई पेड़ो को एक मनचाहा आकर देना है इसलिए इनकी ठीक प्रकार से देखभाल करना और भी अधिक आवश्यक हो जाता हैं। किसी भी पेड़ को अच्छे से उगाने के लिए हम अपनी तरफ से थोड़ा प्रयास करते है तथा बाकी का कार्य प्रकर्ति कर देती है। लेकिन बोनसाई के मामले में हम प्रक्रति पर सब कुछ नहीं छोड़ सकते, अगर हमे ऐसा किया तो हमारा पेड़ बोने रहने के बजाये बड़ा हो जायगा जो हम नहीं चाहते। इसलिए आवश्यक है इन पौधों की सही देखभाल की जाये, आइये जानते है बोनसाई की देख-रेख करने के सही तरीके के बारे में –

A. स्थानन (सही बोनसाई को सही समय पर सही स्थान पर लगाना)

किसी भी पेड़ की देख रेख तब शुरू नहीं होती जब वह उगने लगता है जबकि तब शुरू होती है जब उसे उगान के बारे में विचार किया जाता हैं। यदि बीज, या पौधा सही स्थान पर नहीं बोया गया हो तो यह उस अवस्था को प्राप्त नहीं कर पायेगा जैसा हम चाहते हैं। इसलिए आवश्यक ही कि आप बोनसाई बीज या पौधे को बोने से पहले स्थान का चुनाव अच्छे से कर ले व उस समय की जलवायु भी देख ले। जब हम सही स्थान पर अनुकूलित जलवायु व समय पर बोनसाई का रोपण करते है तो हमे जल्दी व अच्छे परिणाम मिलते हैं। बोनसाई पौधों के स्थानन से पहले जानने योग्य बाते –

a) भीतरी बोनसाई

यदि आप बोनसाई को घर के भीतर लगाने की सोच रहे है तो आपको एक ऐसा स्थान चुनना है जहाँ पर प्रकाश सीधा न पड़े। कुछ बोनसाई होते है जो छाया में या घर की भीतर ही उगने के लिए बने होते है यदि आप भी किसी ऐसे ही बोनसाई को लगा रहे है तो इसे अपनी खिड़की के दक्षिण में रखे। ऐसा करने से सूर्य का प्रकाश तो मिलेगा लेकिन अधिक देर तक नहीं। ऐसे बोनसाई नमी में अधिक उपजाऊ बनते है इसलिए पानी डालते रहना चाहिए तथा सूर्य से पेड़ का सीधा सामना नहीं कराना चाहिए

b) बाहरी बोनसाई

बाहरी बोनसाई वो पेड़ होते है जिन्हें सूरज के प्रकाश की आवश्यकता अधिक होती हैं। यदि आप इन पेड़ो को घर के भीतर लगा देते है तो इनकी प्रगति रूक जाएगी या ये सूख जायेंगे। इसलिए जरूरी है कि आप इन पेड़ो को बाहर बगीचे में लगाये जहाँ धूप अच्छे से मिले। ऐसे बोनसाई को सर्दियों में तो कोई भी परेशानी नहीं होगी क्योंकि सर्दियों में धूप इतनी अधिक तीव्रता की नहीं होती।

गर्मियों में दोपहर के समय धूप बहुत कड़क होती है इसलिए हो सके तो अपने बोनसाई पेड़ो को ऐसी जगह रखे जहाँ इन पर दोपहर के समय छाया आये। गर्मियों में सुबह व शाम की धूप ही इन पेड़ो की प्रगति के लिए अच्छी होगी ।

आशा है अब आप अपने बोनसाई का बाहरी व भीतरी क्रम के अनुसार चुनाव करके उसे सही स्थान पर रोपित करेंगे। इसके लिए यह भी आवश्यक है कि हमे ज्ञान हो हम कौन-सी बोनसाई प्रजाति लगाने जा रहे हैं।

B. सिंचाई

किसी भी बोनसाई की देख-रेख के लिए सबसे महत्वपूर्ण जो चीज है वह है सिंचाई। यदि आप सिंचाई का सही तरीका जानते है तो बोनसाई को मनचाहा रूप देने का आधा काम तो आपका हो ही जाएगा। बोनसाई की प्रजाति के अनुसार ही हमे सिंचाई करनी होती हैं। हमने जिस बोनसाई प्रजाति का पेड़ लगाया है उसके अनुरूप व पेड़ की लम्बाई के अनुसार हमे गमले का आकार, मिट्टी और जलवायु आदि व पौधे को कितनी बार पानी देना है इसका निर्धारण करना होता हैं। बिना जाने कि आपने किस प्रजाति का बोनसाई हमने घर में लगाया है हम यह नहीं जान सकते कि हमे उसे दिन में कितनी बार पानी देना हैं। फिर भी आप नीचे बताये गए तरीको को अपने पेड़ो की सिंचाई के लिए काम में ला सकते हैं।

i. पेड़ो की सिंचाई तब करे जब मिट्टी सुखी दिखाई दे

आपने चाहे बोनसाई घर के अन्दर लगाया हो या घर के बाहर, पर जिस मिट्टी में वह लगा है उसमे नमी बनी रहनी चाहिए। यदि आप देखते है कि पात्र में अभी भी जल है तो उसमे अधिक जल ना डाले क्योंकि ऐसा करना पौधे के विकास पर प्रभाव डालता हैं। हो सकता है हमे गमले की मिट्टी ऊपर से देखने में तो सूखी लग रही हो लेकिन उसके वह नीचे से नम हो। यह चेक करने के लिए कि अभी मिट्टी में नमी है या नै आप मिट्टी में ऊँगली को धंसा कर देखे, यदि नमी दिखाई नहीं देती तो आप सिंचाई कर सकते हैं।

ii. दिनचर्या पर कभी पानी नहीं देना चाहिए

कभी- कभी हम यह सोचते है कि हमने पेड़ को कल सुबह पानी दिया था तो आज सुबह देना चाहिए और फिर ऐसा प्रतिदिन करने लगते हैं। यह जरूरी नहीं है कि आपके पेड़ को पानी की आवश्यकता उस समय है या नहीं, इसलिए मिट्टी व पौधे की जरूरत के अनुसार की सिंचाई करे।

iii. कब और कैसे सिंचाई करे?

बोनसाई की सिंचाई कब व कितनी बार करनी है यह तो उस पेड़ की प्रजाति व आपके अनुभव पर निर्भर करेगा। कुछ कुशल लोग कहते है कि सूर्य की रौशनी में रखे पेड़ को ठंडा पानी नहीं डालना चाहिए, आप सिंचाई के लिए सामान्य जल का ही प्रयोग करे। बोनसाई लगाने के लिए हम ऐसा पात्र या गमला चुनते है जिसके नीचे मध्य में एक छेद होता हैं। हम तब तक पात्र में पानी डालते रहना है जब तक पानी मिट्टी से स्त्रावित होकर गमले के उस छेद से बाहर ना आने लगे।

C. निषेचन करना (खाद डालना)

जिस समय पौधा उग रहा है उस वक्त तो खाद डालना बहुत ही अधिक आवश्यक हैं। बिना सही खाद व सिंचाई के बोनसाई को निश्चित आकार देने की सोच भी नहीं सकते । पात्र की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए हमे सही उर्वरक का चयन करना चाहिए जिसके लिए हमे पेड़ की प्रजाति को जानना भी आवश्यक हैं। आइये जानते है कौन-सा उर्वरक बोंसाई के लिए उपयोगी है तथा कब व कितनी मात्र में देना चाहिए।

किस उर्वरक (खाद) का उपयोग करना चाहिए?

वैसे तो बाजार में कई प्रकार के उर्वरक मौजूद है लेकिन नाइट्रोजन, फास्फोरस, तथा पोटेशियम युक्त खाद का उपयोग बोनसाई के लिए अच्छा माना जाता हैं। नाइट्रोजन पेड़ की पत्तियों व टहनियों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है वही फास्फोरस पेड़ की जड़ो के लिय अच्छा माना जाता हैं। पोटेशियम सम्पूर्ण पेड़ के स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद माना जाता है ।

यदि आपका बोनसाई पेड़ बाहरी मतलब घर के बाहर लगा हुआ है तो ऐसे पेड़ के लिए अधिक नाइट्रोजन युक्त उर्वरक अच्छा रहेगा। यदि आप अपने पेड़ पर फूलो का बेहतर विकास देखना चाहते है तो उच्च गुणवत्ता वाला फास्फोरस युक्त उर्वरक का प्रयोग करना लाभदायक रहेगा। घर के भीतर उपजे बोनसाई के लिए तीनों तत्व नाइट्रोजन, पोटेशियम व फास्फोरस का प्रयोग लाभकारी सिद्ध होता हैं ।

वैसे मिश्रित उर्वरक भीतरी व बाहरी दोनों तरह के बोनसाई पेड़ो के लिए उपयुक्त माना जाता हैं। उर्वरक की सही मात्रा देना बेहद जरूरी है इसलिए आपको इस बारे में जानकारी जरूर इकट्ठी करनी चाहिए।

उर्वरक कब व किस मत्रा में उपयोग करना चाहिए?

बोनसाई पौधों को उस समय खाद जरूर देनी चाहिए जब मौसम पेड़-पौधों के फलने-फूलने का होता हैं। जैसे ही पतझड़ खत्म होता है वैसे ही पेड़, फूलो व फलो से लदने शुरू हो जाते है। ऐसे मौसम में बोनसाई को अच्छे से उर्वरक देना चाहिए। जब पेड़ बड़ा हो जाये मतलब 6-7 महीनो का हो जाये तो उर्वरक देने की मात्रा कम कर देनी चाहिए।

पौधे को कितनी मात्रा में खाद देना है यह तो इस पर निर्भर करता है कि खाद कौन-सा है। जब आप खाद खरीद रहे है तो आवश्यक है कि खाद विक्रेता से अपने पौधे की प्रजाति बताये व उसे अपने पौधे की उम्र भी बताये। आपके द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार उर्वरक विक्रेता आपको अच्छी तरह समझा देगा कि उर्वरक कब व कितना देना हैं। यदि आपको इस बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त नहीं होती तो खाद बार-बार न डाले, अधिक खाद पेड़ के लिए हानिकारक भी साबित हो सकता हैं।

बोनसाई को आकर देना (बोनसाई प्लांट कैसे बनाये) – Styling of Bonsai in Hindi

यह हम सभी जानते है कि बोनसाई बौने पौधे होते है लेकिन हम में से कम लोग यह जानते है कि ये पौधे खुद से उगकर बौने नहीं रह जाते। यदि आप अपने बोनसाई को एक निश्चित समय पर सही आकार देने का प्रयतन नहीं करते तो आपका बोनसाई बिल्कुल आपके आस-पास लगे अन्य पौधों की तरह उगेगा। सही समय पर कांट-छांट न करने से पौधा बौना या छोटा नहीं रहेगा इसलिए बीज या पौधे को लगाकर यह मत सोचे की यह तो बोनसाई है तो छोटा ही रहेगा, ऐसा कदापि नहीं होने वाला। बोनसाई को निश्चित आकार देने के लिय आप निम्न तकनीको का उपयोग कर सकते है –

A). छंटाई (Pruning)

इस बात का आपको हमेशा ध्यान रखना है कि बोनसाई की छंटाई करना एक प्रतिदिन किये जाने वाला कार्य है आप इसे टाल नहीं सकते। बोनसाई ट्री को बढ़ने से रोकने के लिए यह आवश्यक है कि आप थोड़ी-थोड़ी टहनियों व पत्तियों की कटाई करते रहे। आइये विस्तार से जानते है बोनसाई की छंटाई भली-भांति किस प्रकार से करे

  • किसी भी पेड़ को आकार देने से पहले हमारे लिय यह समझना आवश्यक है कि पेड़ बढ़ते कैसे हैं। किसी भी पेड़ का ऊपरी भाग सबसे अधिक वृद्धि करता हैं, पेड़ की जड़े व तना वृद्धि के सभी पौषक तत्व ऊपर के हिस्से पर भेजते है तथा फिर ऊपरी हिस्से का सहारा लेकर स्वयं प्रगति करते हैं।
  • अब हमे समझ आ गया है कि पेड़ को ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए उसकी टहनियों मतलब उपरी हिस्से का विशेषकर ध्यान रखना होगा। आपको एक सामान्य सा कटर या कैंची लेकर टहनियों की प्रतिदिन कटाई करनी हैं।
  • कैंची या अन्य कटाई के यंत्रो से कभी-कभी बोनसाई की टहनियाँ भूरे रंग की सी खराब हो जाती है यदि ऐसा है तो आप उस भूरे रंग के भाग को हाथो के सहारे आराम से निकाल दे किसी यंत्र का प्रयोग न करे।
  • दूसरा तरीका छंटाई करने का जो आपको काम में अवश्य लाना चाहिए वह है पत्तो को झाड़ देना। आप गर्मियों में वृक्ष के पत्तो को गिरा सकते है जिस से नए पत्ते आ सके। ऐसे करने से भी पेड़ का बढ़ना ऊपरी तरफ से रूक जाता है।
  • छंटाई करते वक्त आपको सबसे पहले बड़ी टहनियों को काटना है, और ऐसा करते समय यह भी ध्यान रखना है कि किस टहनी को छोड़ना है। जिस टहनी को काटने से आप छोड़ेंगे वही आपके वृक्ष की बनावट तय करेगी।
  • मृत टहनियों व जिन्हें आप अपने वृक्ष के आकार में नहीं देखना चाहते उन्हें आप हटा दीजिये। कटाई आपको बहुत ही ध्यान से करनी है ऐसा करते वक्त याद रखे कि पेड़ पर अधिक कटाई के निशान न हो इस से पेड़ की बनावट की सुन्दरता कम हो जाएगी।

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बोनसाई की छंटाई कब करे?

वैसे तो बोनसाई की छंटाई हमे नियमित तब तक करनी होगी जब तक पेड़ को उसका सही रूप न मिल जाये। बड़ी टहनियों की कटाई आप नियमित रूप से नहीं कर सकते क्योकि ये इतनी जल्दी फिर से बड़ी नहीं होती। बसंत शुरू होने पर या पत्तझड़ के बाद छंटाई करना वृक्ष की सेहत के लिए अच्छा माना जाता हैं।

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B). तारो से बांधना (Wiring)

जिस प्रकार बोनसाई के वृक्ष को सही आकार देने के लिए छंटाई करना जरूरी है उसी तरह ठीक समय पर वायरिंग करना भी बहुत आवश्यक है। चलिए जानते है बोनसाई को पसंद की आकृति देने के लिए हमे इसे कैसे बांधना होगा।

किस तार का प्रयोग करे?

बोनसाई को बाँधने के लिए मुख्यत: दो प्रकार के तारों का उपयोग किया जाता है एक एलुमिनियम के और दूसरा ताँबे के। पेड़ो को बांधते समय यह भी ध्यान रखना होता है कि बोनसाई के लिए तार किस मोटाई का है। हमारी सलाह माने तो शुरू में आपके लिए 1 मिलीमीटर (mm) से 4 मिलीमीटर मोटाई तक के तारो का उपयोग करना बढ़िया रहेगा। यदि आपको पेड़ को आकृति देने के लिए तार बाँधने का कोई अनुभव नहीं है तो आप एलुमिनियम का तार ही प्रयोग में लाये। क्योंकि एलुमिनियम तार के साथ कार्य करना शुगम है तथा यह ताँबे के तार से सस्ता भी आता है।

तार बाँधने की प्रक्रिया

यदि आप किन्ही दो शाखाओ को एक जैसा आकर देना चाहते है तो आप उन्हें एक ही तार से बाँध कर ऊपर या नीचे की और झुका सकते है।

सबसे पहले आपको एक तार लेना है जिसे एक निश्चित लम्बाई तक काट लेना है जिस से तार तने से लिपट कर पूरी शाखा पर लपेटा जा सके। तार को सर्वप्रथम तने में बांधिए फिर धीरे से उसे शाखा पर लपेटे। यदि पेड़ की टहनी ज्यादा पतली है तो आप रुई लगाकर तार बांधे जिस से टहनी या शाखा पर कोई आघात न हो।

एक बार तार को पूरी शाखा पर लपेटने के बाद बारी आती है उसे मनचाही दिशा में झुकाने की। यहाँ पर आपको दो बातो को विशेष ध्यान रखना है – पहला यह कि अगर आप शाखा को नीचे की ओर झुकाना चाहते है तो आपको तार को नीचे की तरफ से बाँधना है। यदि आप शाखा का रूख ऊपर की ओर करना चाहते है तो तार को तने पर ऊपर से ही लाकर पूरी शाखा पर लपेटे।

शाखा को झुकाना या दिशा देंना बड़ा ही सावधानी का कार्य है आपको शाखा का बाहरी हिस्सा अपनी उंगलियों से पकड़ना है। बाहरी हिस्सा पकड़ने के बाद अंगुठे से शाखा को अन्दर की तरफ धीरे से मोड़ देना है। यह काम पूरी सावधानी से करना है अन्यथा शाखा टूट भी सकती है। टहनी को मनचाही दिशा देने के बाद इसे बार-बार नहीं छूना है ऐसा करना आपकी शाखा के झुकाव की दिशा बदल देगा और आपका बोनसाई वैसा नहीं बन पायेगा जैसा आप चाहते है।

बोनसाई की भिभिन्न प्रजातियाँ (Different Species of Bonsai in Hindi)

बोन्साई पेड़ो की कई प्रकार की प्रजातियाँ पाई जाती हमे अपने यहाँ के वातावरण के अनुसार उपयुक्त बोनसाई का चुनाव करना चाहिए। नीचे हम बोनसाई की कुछ प्रजातियों के बारे में विवरण प्रस्तुत कर रहे है आप चाहे तो इनमे से कुछ का चयन कर अपने घर या बगीचे में लगा सकते है –

i. पतझड़ी बोनसाई

पतझड़ी बोनसाई ऐसे वृक्ष होते है जिनके पत्ते वर्ष में एक बार खुद गिर जाते है। ज्यादातर ये पेड़ अपने पत्ते पतझड़ के मौसम में गिराते है कुछ समय बाद नयी पत्तियों से पेड़ अधिक सुन्दर हो जाता है । कुछ पतझड़ी बोनसाई इस प्रकार है जिन्हें आप नीचे दिए गए लिंक से खरीद सकते है –

ii. सदाबहार बोनसाई

सदाबहार बोनसाई वे पेड़ होते है जो पुरे साल में शायद ही कभी पत्ते गिराते है। इन पेड़ो की पत्तियाँ मुख्यत चौड़ी होती है जो इनकी बनावट को खूबसूरत बनाती है। कुछ सदाबहार बोनसाई इस प्रकार है जिन्हें आप नीचे दिए गए लिंक से खरीद सकते है –

iii. नुकीली पत्तियों वाले बोनसाई

जैसे हम नाम से ही पता चल रहा इन वृक्षों की पत्तियाँ नुकीली होती है। अपने नुकीले पत्तो के कारण ही इनका आकर्षण अन्य बोनसाई से अधिक रहता है तथा ये सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले बोनसाई भी है। कुछ नुकीली पत्तियों वाले बोनसाई निम्नलिखित है जिन्हें आप नीचे दिए गए लिंक से खरीद सकते है –

बोनसाई के फायदे (Advantages of Bonsai in Hindi)

जापान की यह तकनीक बोनसाई पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है व इसकी ख्याति दिन प्रतिदिन बढ़ रही है निश्चित है इसके अनेक फायदे अवश्य होंगे आइये जानते है बोनसाई के फायदों के बारे में –

  1. हम सभी अपने घर सजाने तथा साफ़-सुथरा रखने में बहुत समय लगाते है ताकि हमारा घर खूबसूरत दिख सके। अपने घर को आकर्षक व खूबसूरत बनाने केलिए आप बोनसाई का उपयोग कर सकते है। इनको घर में लगाने से आपको बिल्कुल ऐसा लगेगा जैसे आप किसी सुन्दर बगीचे में रह रहे हो।
  2. बोनसाई की सबसे बढ़िया बात यह है कि इन्हें लगाने के लिए बहुत कम जगह चाहिए। यदि आपका घर या बगीचा बहुत छोटा भी तो भी आप कई सारे बोनसाई लगा सकते है।
  3. किसी भी सामान्य पौधे के विकास के लिए बहुत अधिक पानी तथा देख-रह की आवश्यकता होती है। लेकिन बोनसाई में जल की कम मात्रा से भी विकास पर कुछ दुष्प्रभाव नहीं पढ़ता तथा इसकी देख रेख भी शुगामता से की जा सकती है।
  4. यदि आप धन कमाने की सोच रहे है और आपको बोनसाई पोधों को उगाना आता है तो आप इस एक व्यवसाय के रूप में भी शुरू कर सकते है। इन पेड़ो को बेचकर एवं इनका उर्वरक बेचकर आप अच्छी खासी दौलत कमा सकते है।
  5. बोनसाई पौधे छोटे तथा प्यारे होते है जिस कारण सभी को ये बहुत सुहाते है। आप बच्चो को बोनसाई लगाने व इन्ही देख रेख का दायित्व दे सकते है। ऐसा करने से बच्चे टेलीविज़न तथा मोबाइल से थोड़ा दूर रहेंगे जिस से उनका स्वास्थ्य व मनोदशा भी बेहतर रहेगी।

बोनसाई के नुकसान (Disadvantages of Bonsai in Hindi)

वैसे तो बोनसाई लगाने की कई सारे फायदे है जिनमे से कुछ के बारे में हमने बताता भी है इसके आलावा कुछ लोगो का मानना है कि बोनसाई हानिकारक भी हो सकते है। चलिए जानते है बोन्साई लगाने की क्या हानियाँ हो सकती है।

  1. कुछ बोनसाई पौधों की प्रजाति को नकारात्मक उर्जा फ़ैलाने वाला माना जाता है नागफनी जिनमे से एक है। इसलिए आप नागफनी के पौधे को घर पर लागने से परहेज कर सकते है।
  2. बोनसाई पेड़ छोटे होते है इसी को देखते हुए कुछ लोगो का मत रहता है कि जिस प्रकार बोनसाई का विकास रुक जाता है व यह बढ़ नहीं पाते। उसी प्रकार घर/ऑफिस में लगाने से घर या ऑफिस का विकास भी अवरुद्ध हो जाता है।
  3. कई पेड़ जैसे बबूल, बेर एवं नागफनी आदि को हम घर में नहीं लगाते क्योंकि इनमे काँटे होते है। ठीक वैसे ही हमे ऎसी बोनसाई की प्रजाति को घर में लगाने से बचना चाहिए जिनमे काँटे होते है। छंटाई करते वक्त काँटे आपके हाथ में चुभ सकते है व आपके बच्चो को भी नुकसान पहुँचा सकते है।

FAQ (सवाल-जबाब)

बोनसाई पौधे कौन कौन से होते हैं?

बोनसाई पौधे उन पौधों को कहा जाता है जिनकी उम्र तो बढ़ जाती है लेकिन वे छोटे ही रह जाते है। आम, अनार, आँवला, गुलमोहर, लीची, पीपल तथा बरगद आदि पेड़ की एक अलग तरीके से देखभाल करके बोनसाई (बौने पौधे) बनाया जा सकता है।

बोन्साई संस्कृति का मूल देश कौन सा है?

बोनसाई की शुरुआत चीन से मानी जाती है लेकिन यह कला जापान में ज्यादा प्रचलित है जिस कारण इसे जापानी कला के नाम से जाना जाता है। अत: बोनसाई संस्कृति के मूल देश जापान तथा चीन दोनों है, क्योंकि एक ने बोनसाई तकनीक को पैदा किया और दुसरे ने इसे जीवित रखा।

बरगद की बोनसाई कैसे बनाएं?

बरगद का बोनसाई भी ठीक उसे प्रकार बनाया जाता है जैसे अन्य बोनसाई। बरगद की बोनसाई बनाने के लिए आपको नियमित तौर पर खाद-पानी तथा पौधे की छंटाई करते रहना होगा।

बोनसाई का एक उदाहरण देकर समझाइए

कोई भी पेड़ जिसकी उम्र तो बढ़ रही है लेकिन वह बहुत छोटा रह गया है उसे आप बोनसाई कह सकते है। आपके गमलों में लगे जो पेड़ कई वर्षो से लग रहे है लेकिन उनकी ऊँचाई कम है आप उन्हें बोनसाई कह सकते है।

आज हमने क्या जाना?

आज हमने बोनसाई प्लांट्स के इस ब्लॉग में बोनसाई पौधे क्या है (Bonsai in Hindi), Bonsai Meaning in Hindi, बोनसाई बनाने की विधि, बोनसाई के फायदे और नुकसान, बोनसाई बनाने का तरीका व बोनसाई मिट्टी कैसे बनाएं आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की। उम्मीद करते है बोन्साई कैसे बनाएं का यह विस्तार में लिखा लेख आपको बहुत पसंद आया होगा। आप नीचे कमेंट करते हमसे बोनसाई पौधों के बारे में और जानकारी प्राप्त कर सकते है।

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