डिप्थीरिया या गलाघोंटू के भयानक लक्षण व रोकथाम | Diphtheria in Hindi

डिप्थीरिया क्या है (Diphtheria in Hindi) डिप्थीरिया के लक्षण, बचाव, उपाय, प्रकार, कारण, रोकथाम, गलाघोंटू (Symptoms of Diphtheria in Hindi, Causes, Types, Treatment, Prevention of Diphtheria in Hindi)

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Diphtheria Ka Ilaj – Diphtheria in Hindi

जिस तेजी से हमारा खान-पान बदल रहा है उसी तेजी से छोटे से छोटे रोगों का प्रभाव भी भयाबह होता जा रहा है। कई ऐसी बीमारी है जो एक छोटें से संक्रमण से शुरू होती हैं तथा कभी-कभी घातक रूप लेने की हद तक पहुच जाती है। एक ऐसी ही बीमारी है जिसकी समस्या आजकल बहुत लोगों तक दिखाई देने लगी है इसका नाम है डिफ्थीरिया। आइये जानते है डिफ्थीरिया के लक्षण, कारण एवं इसके दुष्प्रभाव।

डिप्थीरिया क्या है? (Diphtheria in Hindi)

डिप्थीरिया नाक और गले में होने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण होता है। यह नाक और गले की श्लेष्मा झिल्ली को प्रभावित करता है। यह एक ऐसा संक्रमण है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है लेकिन सही समय पर उपचार मिलने से इससे बचा जा सकता है। इसे गला घोटू भी कहा जाता है।

डिप्थीरिया में बुखार, गला खराब होने जैसी समस्याएं होती है लेकिन गले में गहरे ग्रे रंग के पदार्थ की एक मोटी परत जमना इसकी पहचान का प्रमुख लक्षण है। यह परत आपकी सांस लेने वाली नलियों को बंद कर देती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

डिप्थीरिया कैसे होता है? (Galaghontu Kaise Hota Hai)

डिप्थीरिया एक बैक्टीरियल संक्रमण होता है, इसके जीवाणु रोगी के मुंह , नाक और गले में रहते हैं। यदि कोई व्यक्ति इस संक्रमण से ग्रसित होता है तो उसके खांसने और छीकने से यह संक्रमण दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में फैलता है। मानसून की बात करें तो डिप्थीरिया बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

इस रोग में एक मोटी परत गले में जम जाती है, जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इसीलिए किसी भी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में ना आए जो इस बीमारी से ग्रसित है नहीं तो काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

डिप्थीरिया रोग के लक्षण (Symptoms of Diphtheria in Hindi)

डिप्थीरिया एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी से बचने के लिए इसके कुछ खास लक्षणों को जानना बहुत जरूरी है जो इस प्रकार हैं –

  1. डिप्थीरिया एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खास ने और छीकने से आसानी से फैलता है।
  2. इस बीमारी के जीवाणु रोगी के मुंह, नाक और गले में रहते हैं, यह एक संक्रमण की बीमारी होती है।
  3. मौसम की बात करें तो डिप्थीरिया बारिश के मौसम में सबसे अधिक फैलता है क्योंकि बारिश में इसके जीवाणु अधिक कार्यशील होते हैं।
  4. डिप्थीरिया के लक्षण संक्रमण से लेकर 2 से 5 दिनों में दिखाई देते हैं।
  5. इस बीमारी में त्वचा का रंग नीला पड़ने लगता है।
  6. डिप्थीरिया के संक्रमण होने पर सांस लेने में कठिनाई होने लगती है इसके अलावा गर्दन में सूजन भी हो सकती है।
  7. डिप्थीरिया का संक्रमण फैलने के बाद शरीर में बेचैनी के साथ -साथ बुखार भी रहने लगता है।
  8. डिप्थीरिया में जो खांसी आती है उसकी आवाज अलग तरह की होती है।

डिप्थीरिया के कारण (Causes of Diphtheria in Hindi)

डिप्थीरिया एक प्रकार के बैक्टीरिया के इंफेक्शन से होता है, इस बैक्टीरिया का नाम- कारीनेबैक्टेरियम है। इस बीमारी में बैक्टीरिया सबसे पहले गले को नुकसान पहुंचाता है। इसके बाद धीरे धीरे इंफेक्शन का असर सांस नली में होने लगता है वहां पर यह बैक्टीरिया झिल्ली की एक परत बना देता है, जिसके कारण सांस लेने में काफी समस्या होने लगती है। डिप्थीरिया फैलने के कई कारण है जो नीचे दिए गए हैं –

  • यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खासने और छीकने से आसानी से फैलता है।
  • किसी व्यक्ति के खांसने और छीकने से डिप्थीरिया के कीटाणु हवा में घुल जाते हैं आस-पास मौजूद लोग इन्हें सांस से अंदर ले लेते हैं। और इस संक्रमण से ग्रसित हो जाते हैं।
  • किसी भी संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं को छूने से या उनके झूठे बर्तन इस्तेमाल करने से भी डिप्थीरिया फैलता है।
  • यदि कोई व्यक्ति डिप्थीरिया से संक्रमित है तो बिना सावधानी बरतें उसका इलाज नहीं किया जा सकता नहीं तो संक्रमण का खतरा दूसरे व्यक्ति को हो सकता है।
  • भीड़ भाड़ वाली जगह पर डिप्थीरिया का खतरा अधिक होता है।

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डिप्थीरिया की रोकथाम या बचाव के उपाय (Prevention of Diphtheria in Hindi)

नियमित रूप से टीकाकरण द्वारा बच्चों को डिप्थीरिया से बचाया जा सकता है। वैक्सीनेशन ही एकमात्र डिप्थीरिया से बचने का उपाय हैं।

डिप्थीरिया में नियमित टीकाकरण में डीपीटी (डिप्थीरिया, परटूसस काली खांसी और टिटनेस) का टीका लगाया जाता है।

1 साल के बच्चे को डीपीटी के तीन टीके लगते हैं। और चौथा टीका डेढ़ साल और पांचवा टीका 4 साल की उम्र पर लगता है।

वैक्सीनेशन के बाद डिप्थीरिया होने की संभावना नहीं रहती। डीपीटी का टीका एक ऐसा टीका है जो बच्चों को कई संक्रामक बीमारियों से बचाता है। इस टीके के लगने के बाद शरीर में जो जीवाणु होते हैं वह नष्ट हो जाते हैं जिससे शरीर सुरक्षित रहता है। लेकिन टीके का असर 10 सालों तक ही रहता है इसीलिए बच्चे को 12 साल के आसपास फिर से टीके की आवश्यकता होती है। बड़ों को डिप्थीरिया और काली खांसी के टीके एक ही बार में लगवा लेना चाहिए।

डिप्थीरिया के उपचार (Diphtheria Ka Ilaj)

यह एक गंभीर बीमारी है जिसका इलाज डॉक्टर विभिन्न दवाइयों से करते हैं जो इस प्रकार है।

1. एंटी-टॉक्सिन

यदि किसी व्यक्ति या बच्चे में डिप्थीरिया का संदेह होता है तो डॉक्टर द्वारा एंटी टॉक्सिन दवाई दी जाती है। एंटी टॉक्सिन का टीका शरीर में नस या मांसपेशी में मौजूद डिप्थीरिया के विषाणु के प्रभाव को बेअसर कर देता है।

एंटी टॉक्सिन देने वाले, पहले डॉक्टर इस बात की जांच करते हैं कि रोगी को एंटी टॉक्सिन का टीका लगने से कोई एलर्जी तो नहीं हुई। यदि एलर्जी होती है तो पहले ऐसे व्यक्ति को एंटीटॉक्सिन के प्रति असंवेदनशील बनाया जाता है। इसके लिए डॉक्टर रोगी को पहले एंटीटॉक्सिन की कम खुराक ही देते हैं और उसके बाद खुराक को धीरे धीरे बढ़ाया जाता है।

2. एंटीबायोटिक दवाई

डिप्थीरिया का इलाज पेनिसिलिन और एरिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक दवाओ से किया जाता है। ये एंटीबायोटिक दवाइयां शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को मारकर धीरे धीरे संक्रमण को ठीक कर देती हैं।

जिन व्यक्तियों या बच्चों को बार-बार डिप्थीरिया होता है तो उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। डिप्थीरिया एक ऐसा संक्रमण है जो हर ऐसे व्यक्ति में फैल सकता है जिसका टीकाकरण नहीं हुआ इसलिए इससे ग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल में सबसे अलग रखा जाता है। बच्चों और बड़ों को डिप्थीरिया से ग्रस्त व्यक्ति से दूर रखना चाहिए।

यदि गले में मौजूद ग्रे परत से सांस लेने में तकलीफ होती है तो डॉक्टर इसे हटा भी सकते हैं।

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डिप्थीरिया का निदान (Diagnosis)

डिप्थीरिया के निदान में डिप्थीरिया का परीक्षण शामिल है। डिप्थीरिया के लिए कई परीक्षण किए जाते हैं, जब डॉक्टर को डिप्थीरिया का संदेह होता है तो वह आपके शरीर के कई परीक्षण करते हैं जो इस प्रकार हैं –

  • सबसे पहले डॉक्टर आपसे बीमारी के लक्षण और पहले हुई बीमारियों के बारे में पूछेंगे उसके बाद लसीका ग्रंथियों में सूजन की जांच करने के लिए शारीरिक परीक्षण किया जाएगा।
  • आपको डिप्थीरिया है या नहीं इसकी पुष्टि करने के लिए डॉक्टर आपके गले में प्रभावित उत्तक का एक नमूना लेंगे और इसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेज देंगे और आपका throat culture जांच भी किया जा सकता है।
  • जो उत्तक का नमूना संदिग्ध व्यक्ति के गले से लिया जाता है उसमें से बैक्टीरिया को अलग करने के बाद उसकी विषाक्तता की जांच की जाती है।
  • जांच के लिए नाक और गले के सैंपल भी लिए जाते हैं।
  • संदिग्ध लोगों के करीबी रिश्तेदारों के भी सैंपल लिए जाते हैं।

डिप्थीरिया से होने वाली परेशानियां या जोखिम (Complications)

डिप्थीरिया ऐसा संक्रमण है यदि यह गले के संक्रमण से आगे फैल जाता है तो इसके विषाक्त पदार्थ रक्त के माध्यम से अन्य अंगों जैसे-दिल और गुर्दों में फैल जाते हैं जिससे कई घातक बीमारी हो सकती है। ये विषाक्त पदार्थ गुर्दों की बेकार पदार्थ निकालने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और हृदय की रक्त पंप करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसीलिए डिप्थीरिया का इलाज ना होने पर निम्नलिखित समस्याएं या जटिलताएं हो सकती है –

1. सांस लेने में समस्या

डिप्थीरिया में व्यक्ति के नाक, गले या सांस लेने वाली नलिकाओं में एक मोटी परत बन जाती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। और सांस फूलने लगता है। इस स्थिति में इलाज ना मिलने पर इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

2. हृदय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

यदि डिप्थीरिया के विषाक्त पदार्थ गले से आगे चले जाते हैं तो ये आपके रक्त मे फैल सकते हैं और हृदय के उत्तकों को नुकसान पहुंच सकते है जिससे हृदय में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती है। यह समस्या अधिक बढ़ने पर इससे मौत भी हो सकती है।

3. तंत्रिका को नुकसान

डिप्थीरिया में मौजूद विषाक्त पदार्थों से तंत्रिका को भी नुकसान हो सकता है। इससे ज्यादातर गले की तंत्रिका को नुकसान होता है जिससे कुछ भी खाने और निगलने में दिक्कत होती है और इसके अतिरिक्त हाथों और पैरों की तंत्रिकाओं में भी सूजन हो सकती है जिससे हाथ और पैर की मांसपेशियां कमजोर होती हैं। इस स्थिति में शरीर को लकवा मार सकता है।

डिप्थीरिया से होने वाली इन जटिलताओं से ग्रस्त अधिकतर लोग बच जाते हैं लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने में समय लगता है यदि इलाज ना मिले तो 50% लोगों की मृत्यु भी हो सकती है।

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डिप्थीरिया के प्रकार (Types of Diphtheria in Hindi)

डिप्थीरिया मुख्यतः चार प्रकार के होते है, जिनके नाम इस प्रकार है –

1. क्लासिक श्वसन डिप्थीरिया

जैसे की नाम से ही पता चल रहा है यह डिप्थीरिया श्वसन क्रिया में अवरोध उत्पन्न कर देता है। श्वसन डिप्थीरिया सबसे आम है दुनिया में सबसे अधिक लोग इसी डिप्थीरिया से प्रभावित होते है।

2. स्वरयंत्र डिप्थीरिया

स्वरयंत्र डिप्थीरिया क्लासिक श्वसन डिप्थीरिया के जैसा ही है। स्वरयंत्र मनुष्यों के गले में मौजूद एक श्वसन अंग होता है , इसी से ही हम कई प्रकार की आवाजे निकालने में समर्थ होते है। जब संक्रमण इस अंग को प्रभावित करता है तो उसे स्वरयंत्र डिप्थीरिया कहते है।

3. नाक डिप्थीरिया

यह डिप्थीरिया नाक को प्रभावित करता है। नाक डिप्थीरिया में आपकी नाक की श्लेष्म झिल्ली पर प्रभाव पड़ता है। इसमें शुरू में तो स्त्राव की समस्या ही दिखाई देती है लेकिन बाद में रक्त आना भी शुरू हो सकता हैं।

4. त्वचीय डिप्थीरिया (त्वचा के घाव)

त्वचीय डिप्थीरिया शुरू तो एक फुंसी के रूप में होता है लेकिन यह जल्द ही एक घाव का रूप ले लेता है।

जाने – इन सभी में सबसे अधिक क्लासिक श्वसन डिप्थीरिया के केस ही आते है। अन्य डिप्थीरिया की समस्या होना बहुत ही कम देखा जाता है।

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FAQ (सवाल-जबाब)

डिप्थीरिया की खोज किसने की

जर्मन जीवाणु विज्ञानी एडविन क्लेब्स और फ्रेडरिक लोफ्लर ने ही डिप्थीरिया को पहचाना एवं इसकी खोज की।

खांसी और डिप्थीरिया कैसे फैलता है?

खांसी और डिप्थीरिया दोनों ही खासने एवं छीकने से निकलने वाले विषाणुओ से दुसरे व्यक्तिओं में फैलते है।

डिप्थीरिया का दूसरा नाम क्या है?

डिप्थीरिया का दूसरा नाम रोहिणी या गलाघोंटू है। क्योंकि इस रोग में गले में स्वास लेने में दिक्कत होती है इसलिए इसे इस नाम से जाना जाता है।

ध्यान देने योग्य

डिप्थीरिया या गलाघोंटू का समय पर इलाज ना करना घातक हो सकता है। इसलिए पोस्ट में बताये गए कोई भी लक्षण यदि आपको दिखाई देते है तो चिकित्सक से जल्द से जल्द संपर्क करे।

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आज हमने क्या जाना?

आज हमने डिप्थीरिया के इस लेख में गलाघोंटू या डिप्थीरिया (Diphtheria in Hindi) के बारे में विस्तार से जाना। हमने डिप्थीरिया के लक्षण (Symptoms of Diphtheria in Hindi), डिप्थीरिया की रोकथाम, डिप्थीरिया के प्रकार, डिप्थीरिया के उपचार (Diphtheria Ka Ilaj), निदान के बारे में विस्तार से बात की। इस लेख से सम्बन्धित किसी भी सुझाव के लिए हमे कमेंट बॉक्स में बताना न भूले।

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