उत्तराखंड के 11 सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल | Uttarakhand Tourist Places in Hindi

उत्तराखंड में घूमने की जगह (Uttarakhand Me Ghumne Ki Jagah) उत्तराखंड के एतिहासिक स्थल, प्रसिद्ध स्थान, उत्तराखंड जाने का सही समय (Uttarakhand Tourist Places in Hindi, Right time to explore)

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उत्तराखंड में घुमने की जगह – Uttarakhand Tourist Places in Hindi

उत्तराखंड एक बहुत सुन्दर पहाड़ी राज्य है, जो किसी पहचान का मोहताज नहीं है। हिंदी और संस्कृत में उत्तराखंड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। उत्तराखंड को नदियों का राज्य कहा जाता हैं क्योंकि यह गंगा और यमुना नदियों का उद्गम स्थल है। आप सब तो जानते हैं पहाड़ी क्षेत्र का नाम सुनकर ही एक सुकून सा मिलता है क्योंकि वहां पर गर्मियों के मौसम में भी मानसून काफी अच्छा रहता है। इसीलिए पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकतर पर्यटक घूमने के लिए आते रहते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन का अपना अलग ही आनंद होता है।

इन क्षेत्रों में हमें बहुत सी ऐसी चीजेंदेखने को मिलती है जो हमें मैदानी क्षेत्रों में नहीं मिल पाती। अगर आप कहीं पर्यटन के लिए जाना चाहते हैं तो उत्तराखंड का पर्यटन जरूर करें क्योंकि यह मन को शांति प्रदान करता है। पहाड़ी क्षेत्रों में जाकर आप मानसिक तनाव को भूल जाते हैं। आइये जानते है उत्तराखंड के प्रसिद्ध स्थानों (Uttarakhand Tourist Places in Hindi) के बारे में –

उत्तराखंड का इतिहास संक्षेप में (Brief History of Uttarakhand in Hindi)

उत्तराखंड जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है यह भारत के उत्तर में उत्तर प्रदेश से सटा एक पहाड़ी राज्य है। सन 2000 तक उत्तराखंड उत्तरप्रदेश राज्य का ही एक भाग था जिसे बाद में एक प्रथक राज्य बना दिया गया। उत्तराखंड को 2007 तक उत्तराँचल के नाम से जाना जाता था। यह प्रदेश दो क्षेत्रो में विभाजित है पहला गढ़वाल और दूसरा कुमाऊँ। उत्तराखंड प्रदेश अपना बॉर्डर नेपाल, तिब्बत, उत्तर प्रदेश, तथा हिमाचल प्रदेश से साझा करता है।

राज्य उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश से अलग होकर कब राज्य बना?9 नवम्बर 2000 को
राजधानी देहरादून
जिले 13
विभाजित क्षेत्र गढ़वाल व कुमाऊँ
आधिकारिक भाषा हिंदी तथा संस्कृत
क्षेत्रीय भाषा गढ़वाली, कुमओनी व जौनसारी
क्षेत्रफल 53,483 वर्किग मी०
जनसँख्या लगभग 1 करोड़ 10 लाख
सबसे ऊँची चोटी नंदा देवी (नैनीताल)
प्रमुख धर्म हिन्दू

उत्तरखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल (List of Uttarakhand Tourist Places in Hindi)

उत्तराखंड बेहद ही ख़ूबसूरती से सुशोभित शहर है यहाँ बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे मुख्य दर्शन स्थल है. इस पहाड़ी राज्य में अन्य बहुत सारे पवित्र तीर्थ स्थान है, जिनके बारे में हम आपको आगे जानकारी देंगे। आइये जानते है उत्तराखंड में घूमने की जगहों के बारे में –

1. हर की पौड़ी (Har ki Paudi)

हर की पौड़ी उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार जिले में स्थित है। यह हिंदुओं का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह। हिंदू धर्म के घाटों में से सबसे प्रसिद्ध घाट है। हर की पौड़ी की एक मान्यता यह है कि जो भी मनुष्य यहां स्नान करता है उसके इस जन्म के और पिछले सारे जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। इस घाट पर रोजाना हजारों लाखों लोग स्नान करने आते हैं। यहां श्रद्धालुओं की बहुत भीड़ लगी रहती है।

हर की पौड़ी घाट का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भर्तृहरि की मृत्यु के पश्चात कराया था क्योंकि विक्रमादित्य के भाई ने गंगा नदी के तट पर कई वर्षों तक तपस्या की थी।

माना जाता है कि हर की पौड़ी पर विष्णु के पदचिन्ह होने की बात कही जाती है इसीलिए इस स्थल का नाम भगवान हरि के नाम पर हर की पौड़ी रखा गया। हर की पौड़ी मतलब हरि के चरण।

यहां की एक मान्यता यह भी है कि हर की पौड़ी पर स्नान करने से मोक्ष, अर्थ, और धर्म चारो की प्राप्ति होती है। यहां पर कुंभ स्नान का विशेष महत्व है। कुंभ स्नान के समय हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं की लाखों की तादाद में भीड़ उमड़ आती है।

2. लक्ष्मण झूला (Lakshman Jhula)

लक्ष्मण झूला ऋषिकेश में स्थित है। ऋषिकेश से लगभग 5 किलोमीटर आगे बना हुआ है। लक्ष्मण झूला लोहे की मजबूत जंजीरों ,चादरों आदि से बंधा व कसा हुआ है। लक्ष्मण झूला एक लोहे से बना पुल है जो गंगा नदी के एक किनारे को दूसरे किनारे से जोड़ता है।

लक्ष्मण झूला एक झूलता हुआ पुल है। लक्ष्मण झूला ऋषिकेश की एक खास पहचान है।

इस पुल का निर्माण कोलकाता के सेठ सूरजमल झुहानूबला ने सन 1889 में कराया था। माना जाता है कि इससे पहले जूट की रस्सियो का पुल ही हुआ करता था जिसके सहारे छीके में बैठकर गंगा के एक किनारे से दूसरे किनारे जाया जाता था। लेकिन 1924 की बाढ़ में लोहे के तारों से बना यह पुल भी बह गया।

दोबारा इस पुल की नीव 1927 में रखी गई और 1930 में इसका निर्माण हो गया। दोबारा इस पुल का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था।

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब यह पुल जूट की रस्सी से बना हुआ था तब श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने इस पुल से गंगा नदी को पार किया था तभी से इस पुल का नाम लक्ष्मण झूला पड़ गया। लक्ष्मण झूला गंगा नदी के ऊपर बना हुआ एक झूलता हुआ पुल है।

लेकिन इस समय सरकार ने लक्ष्मण झूला पर आवागमन को बंद कर दिया है। यह लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है। ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला पर्यटन का मुख्य केंद्र है इसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं इसके अलावा भी ऋषिकेश में और भी पर्यटन स्थल है।

लक्ष्मण झूले के पश्चिमी छोर पर लक्ष्मण जी का एक मंदिर भी है। लक्ष्मण झूला के अलावा ऋषिकेश में एक ओर पूल हैं जिसको राम झूले के नाम से जाना जाता है। लक्ष्मण झूले पर सौगंध जैसी कई फिल्मों की शूटिंग भी हुई है। लक्ष्मण झूला धार्मिक रूप से भी हमसे जुड़ा हुआ है क्योंकि यह लक्ष्मण जी से संबंधित है।

3. केदारनाथ (Kedarnath)

केदारनाथ भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक धार्मिक पवित्र स्थल है। यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में है। केदारनाथ में शिव जी का सबसे विशाल मंदिर है। जो कतवा पत्थरों के विशाल शिलाखंडो को जोड़कर बनाया गया है। यह शिलाखंड भूरे रंग के होते हैं। यह मंदिर 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना है। इसका गर्भ ग्रह 80 वीं शताब्दी के लगभग माना जाता है। केदारनाथ हिंदू धर्म के 4 प्रसिद्ध धामों में से एक है।

ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपने रक्त संबंधियों की हत्या के अपराध से खुद को मुक्त करने के लिए भगवान शिव की मांग की थी। केदारनाथ की भूमि को स्वर्ग के समान माना जाता है ।

पौराणिक कथा के अनुसार हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण ऋषि ने कठोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर हमेशा के लिए इस स्थान पर निवास करने लगे।

4. गंगोत्री (Gangotri)

यह भारत के उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित है। उत्तराखंड में उत्तरकाशी से 100 किमी की दूरी पर गंगोत्री नाम का एक छोटा सा तीर्थ स्थान है। यह एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। यह हिमालय पर्वत माला में स्थित है जो समुद्र तल से 3750 मीटर की ऊंचाई पर है। गंगोत्री भागीरथी नदी के तट पर बसा हुआ है। गंगोत्री चार धाम एवं दो धाम दोनों तीर्थ यात्राओं के लिए एक पवित्र स्थान है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी गंगा ने राजा भगीरथ और उनके पूर्वजों के पापों को धोने के लिए इस गंगा का रूप धारण किया था और भगवान शिव ने पृथ्वी को बहने से बचाने के लिए इसे अपनी जटाओं में रोक लिया था। यह अपने उद्यम स्थल पर भाग्यवती के नाम से भी जानी जाती है। इसका जलाशय स्थल घने जंगलों में हैं। गंगोत्री प्राचीन मंदिरों एवं धार्मिक विश्वासों के लिए प्रसिद्ध है।

यहां हर साल लाखों की तादाद में श्रद्धालु गंगोत्री दर्शन के लिए आते हैं और इसमें स्नान करके अपने पापों को दूर करते हैं। गंगोत्री में श्रद्धालुओं की बहुत आस्था और विश्वास है।

5. बद्रीनाथ (Badrinath)

बद्रीनाथएक धार्मिक स्थल है। बद्रीनाथ भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यहां के बारे में कहा जाता है कि यहां पहले भगवान शिव का निवास हुआ करता था लेकिन बाद में भगवान विष्णु ने इस स्थान को भगवान शिव से मांग लिया था। बद्रीनाथ चार धामों में से एक प्रसिद्ध धाम है यहां हर वर्ष हजारों लाखों लोग पर्यटन के लिए आते हैं।

बद्रीनाथ धाम दो पर्वतों के बीच स्थित है नर और नारायण पर्वत कहा जाता है। भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने यहां तपस्या की थी।

यहां से जुड़ी एक मान्यता यह है की, जो आए बद्री वो ना आए ओदरी, इसका मतलब है जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन एक बार कर लेता है उसे दोबारा माता के गर्भ में प्रवेश नहीं करना पड़ता।

हां यहां की एक मान्यता यह भी है कि जब केदार और बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं उस समय मंदिर में जलने वाले दीपक के दर्शन का खास महत्व है यह दीपक 6 महीने तक ऐसे ही जलता रहता है। इस मंदिर के कपाट खुलने की तिथि ज्ञानी पंडित द्वारा तय की जाती है।

तय की गई तिथि के अनुसार ही मंदिर के कपाट खुलते हैं कपाट खुलने के समय का नजारा बहुत ही अद्भुत होता है क्योंकि माना जाता है कि जब मंदिर के कपाट खुलते हैं तो 6 महीने पहले जो दीपक जलाया गया था वह ऐसे ही प्रज्वलित मिलता है.

6. यमुनोत्री (Yamunotri)

यमुनोत्री यमुना नदी को ही कहा जाता है और यह बहुत ही पवित्र स्थल है। यह नदी चंपासर ग्लेशियर से निकलती है जो भौगोलिक दृष्टि से समुद्र तल से 4421 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह बंदर पुंछ पर्वत पर स्थित है जो समुद्र तल से 3293 की ऊंचाई पर है। पर्यटकों के लिए यहां पर पहुंचना काफी कठिन होता है। हिंदू धर्म ग्रंथों और पुराणों में इस नदी की बहुत मान्यता है इसीलिए यह एक पूजनीय पवित्र स्थल है।

यमुनोत्री उत्तराखंड राज्य में स्थित है जो उत्तराखंड की चार धाम यात्रा के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। इस मंदिर में हिंदू भगवान यम के साथ हिंदू देवी यमुना की एक मूर्ति विराजमान है। यह मंदिर यमुना देवी को समर्पित यमुनोत्री धाम का एक पौराणिक मंदिर हैं।

यहां पर मुख्य आकर्षण का केंद्र जानकी चट्टी पर स्थित गर्म पानी के फव्वारे भी है। इतिहासकारों के अनुसार महाराजा प्रताप शाही ने यमुनोत्री मंदिर का निर्माण कराया था। और इस धाम का उन्हें निर्माण 19वीं सदी में हुआ था जो जयपुर की महारानी गुलेरिया ने कराया था। जय स्थान उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के कॉलिंद पर्वत पर स्थित है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर बहन के साथ धर्मराज यमराज विराजमान है। माता यमुना सूर्य देव की पुत्री हैं और धर्मराज यमराज की छोटी बहन।

इसी तरह हमारे देश में बहुत से ऐसे पवित्र स्थल और मंदिर हैं जो अपने आप में एक खास पहचान रखते हैं और इन मंदिरों की कोई न कोई खास विशेषता होती है। इसीलिए लोग इन मंदिरों में दर्शन के लिए जाना चाहते हैं और हिंदू धर्म में इन तीर्थ स्थलों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।

यमुनोत्री मंदिर को माता यमुनोत्री का मंदिर के नाम से जाना जाता है जो हिमालय क्षेत्र के पश्चिमी भाग में स्थित है। माना जाता है कि यमुना देवी की काले संगमरमर की प्रतिमा मंदिर के गर्भ ग्रह में प्रतिष्ठित है। इस धाम का मुख्य आकर्षण देवी यमुना के लिए समर्पित मंदिर एवं जानकी चट्टी है।

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7. नैनी झील (Naini Jheel)

नैनी झील उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में स्थित है। यह झील चारों ओर से पहाड़ों से घिरी हुई है। यह नैनीताल की सबसे प्रसिद्ध झील है इसीलिए इस झील के नाम पर ही नैनीताल का नाम नैनीताल पड़ा है। नैनी झील आकार में नाशपाती के जैसी दिखाई देती है।

यह झील नैनीताल का मुख्य आकर्षण व सुंदरता का केंद्र बिंदु है। मान्यता है कि जब एक बार एक अत्री पुलस्त्य और पुलह ऋषि नैनीताल में भ्रमण करने निकले और भ्रमण करते करते उन्हें प्यास लगी लेकिन कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने एक गड्ढा खोदकर मानसरोवर झील से पानी लाकर उसमें भरा तभी से इस गड्ढे ने एक झील का रूप धारण कर लिया।

इस झील के सात पहाड़ियों के बीच स्थित होने के कारण इस का दृश्य काफी अलौकिक है। इस झील के समीप मां नैना देवी का एक अत्यंत सुंदर मंदिर है जहां पर्यटक पर्यटन के लिए आते हैं। झील के उत्तरी किनारे को मल्लीताल और दक्षिणी किनारे को तल्लीताल कहा जाता है। इस झील की लंबाई1,500 मीटर, चौड़ाई 510 मीटर, व गहराई 30 मीटर है। नैना देवी मंदिर का पुनः निर्माण किया गया था क्योंकि यह एक बार भूस्खलन में नष्ट हो गया था।

नैनी झील के एक छोर से दूसरे छोर पर जाने के लिए नौका का इस्तेमाल किया जाता हैं। यहां पर पर्यटक दूर-दूर से घूमने के लिए आते हैं और वोटिंग का लुफ्त उठाते हैं। यहां का वातावरण बहुत ही मनमोहक और शांतिपूर्ण होता है। नैनी झील नैनीताल की सभी झीलों मैं से सबसे प्रसिद्ध झील है।

8. नंदा देवी (Nanda Devi)

नंदा देवी पर्वत उत्तराखंड राज्य में पश्चिम में ऋषि गंगा घाटी और पूर्व में गोरी गंगा घाटी के बीच में स्थित है। यह कंचनजंगा के बाद भारत के हिमालय पर्वत की दूसरी एवं विश्व की 23 वीं सबसे ऊंची चोटी है। इस की ऊंचाई लगभग 7816 मीटर है। नंदा देवी पूरे गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल और हिमालय के अन्य भागों में सामान्य जनों की लोकप्रिय देवी है। इसकी उपासना प्राचीन काल से ही धर्मगुरुओं द्वारा की गई है इसका प्रमाण धार्मिक ग्रंथों, उपनिषदों और पुराणों में मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार गौरी के 6 रूप बताए गए हैं। इन 6 रूपों में से नंदा देवी भी एक हैं। नंदा को नवदुर्गा में भी एक बताया गया है।

सारे हिमालय में शक्ति के रूप में नंदा देवी पूजनीय है। नंदा देवी का मूल धाम चमोली के कुरून गांव में होने के कारण बाद में कई जगह इनके मंदिर बनवाए गए। गढ़वाल में तल्ली दसौली, सिमली, चांदपुर आदि स्थानों में नंदा के इस शक्ति रूप की पूजा की जाती है। नंदा देवी के सम्मान में गढ़वाल में राज जात यात्रा का आयोजन भी किया जाता है।

अल्मोड़ा के राजा के आक्रमण लूट के बाद बधाण गढ़ी में नंदा के मुख्य मंदिर कुरूण की नंदा देवी की मूर्ति अल्मोड़ा में स्थापित की गई। इस देवी के सम्मान में अनेक स्थानों पर मेलों के रूप में समारोह आयोजित किए जाते हैं। नैनीताल में नंदा देवी मेला अपनी संपन्न लोक विरासत के कारण कुछ अलग ही छाप छोड़ता है।

लेकिन नंदा देवी मंदिर में प्रति वर्ष भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को लगने वाले मेले की रौनक कुछ अलग होती है यह मेला अल्मोड़ा नगर के मध्य में स्थित ऐतिहासिक नंदा देवी मंदिर में लगता है। इस चोटी को उत्तराखंड राज्य में मुख्य देवी के रूप में पूजा जाता है।

नंदा देवी गढ़वाल के राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री हैं इसीलिए सभी कुमाऊनी और गढ़वाली रोग उन्हें पर्वताचल की पुत्री मानते हैं। कहीं हिंदू तीर्थ यात्रा के धार्मिक रूप में इस मंदिर की यात्रा करते हैं क्योंकि नंदा देवी को बुराई के विनाशक के रूप में माना जाता है। इस का मंदिर शिव मंदिर की बाहरी ढलान पर स्थित है। नंदा देवी का इतिहास 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है इस मंदिर में दीवारों पर पत्थर से कलाकृतियां और पत्थर का मुकुट विद्यमान है जो इसकी शोभा को अत्यधिक बढ़ाते हैं।

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9. मॉल रोड (Mall Road)

मॉल रोड भारत के नैनीताल के सबसे अच्छे पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां पर आपको पहाड़ों और गहरी घाटियों के दिलचस्प दृश्य देखने को मिलेंगे। माल रोड एक ऐसी जगह है जहां पर आप प्राकृतिक सुंदरता का लुफ्त उठाते हुए विभिन्न व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं और साथ ही साथ सैर का भी आनंद ले सकते हैं।

माल रोड नंदा देवी से कुछ दूरी पर स्थित है जहां से आप पैदल टहल कर यहां की इमारतों और स्मारकों को देख सकते हैं। यह पैदल चलने वालों के लिए अनुकूल है क्योंकि यह नो-व्हीकल जॉन है। यह जगह विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और उत्सवो के दौरान बहुत ही आनंददायक लगती है। यह शिमला की एक ऐसी जगह है जहां पर पर्यटक कुछ समय के लिए अपने आप को इस जगह में खो देते हैं। यह रोड विभिन्न प्रकार के कैफे और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है।

यदि आप मॉल रोड पर सेर करने के लिए आते हैं तो बिना शॉपिंग आपका सेर करना व्यर्थ है। यहां की कई दुकानें और शोरूम व डिपार्टमेंटल स्टोर काफी प्रसिद्ध है। यहां पर मिट्टी के बर्तन आभूषण और ऊनी कपड़े भी मिलते हैं जो हिमाचल एंपोरियम प्रदान करता है। यहां पर आप स्थानीय और ब्रांडेड कपड़े दोनों खरीद सकते हैं।

मॉल रोड पर आपको तिब्बती कालीन और पश्मीना शॉल कि स्थानीय दुकानें और टेंट भी दिखाई देंगे। यहां पर आप दुकानों से दस्ताने मौजे और स्वेटर भी ले सकते हैं। यहां पर दुकानदार सामान के दाम बहुत ही अधिक और अनुचित मूल्य पर लगाते हैं।

मॉल रोड पर कहीं कैफे और होटलो में स्वादिष्ट व्यंजन मिलते हैं यहां के कैफे और होटल न केवल स्थानीय व्यंजनों में विशेष होते हैं बल्कि अन्य स्थलों की व्यंजनों में भी अच्छे होते हैं।

एक राजा के ब्रिटिश वायसराय की बेटी के साथ भाग जाने के कारण स्कैंडल प्वाइंट ज्यादा प्रसिद्ध है। मॉल रोड पर आप स्कैंडल प्वाइंट, गेयटी थिएटर, कालीबाड़ी मंदिर, टाउन हॉल देख सकते हैं ।

10. बीटल्स आश्रम (Beatles Aashram)

बीटल्स आश्रम भारत के उत्तराखंड राज्य के ऋषिकेश मे है जो गंगा नदी के किनारे बसे राजा जी नेशनल पार्क के अंदर स्थित है। यह जगह तीन दशकों से बंद थी जो अब पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। इस जगह के पास एक नया योगा और मेडिटेशन सेंटर बनाने की योजना उत्तराखंड के जंगल विभाग द्वारा बनाई गई है।

बीटल्स आश्रम का नाम एक बैड के नाम पर रखा गया है जो बीसवीं सदी के सबसे बड़े रॉक बैंड द बीटल्स था। यह ब्रिटेन का सबसे मशहूर बैंड था जिसने पूरी दुनिया में करोड़ों दिलों पर अपनी जादुई धुन से राज किया हुआ था। 4 युवाओं ने साठ के दशक में इस बैंड से जो करिश्मा रचा उसने संगीत जगत को एक बड़ी धरोहर प्रदान की।

इस बैंड को करोड़ों कान सुनने लगे ,लाखों लोग गुनगुनाने लगे और दिल और दिमाग जुनून से सराबोर हो उठे। बीटल्स ने चार लोगों के साथ मिलकर अपने रॉक बैंड से देश दुनिया में धूम मचा दी। इसके गीत व धुने अव्वल दर्जे के थे। बीटल्स ने गीतों में ऐसा रस घोला कि आज भी कानों में उनके गीत गूंजते हैं।

साठ के दशक में जब दुनिया बीटल्स के रॉक म्यूजिक की दीवानी थी ठीक उसी समय इन रॉकस्टार की दीवानगी और दिलचस्पी योग व अध्यात्म की ओर जागी फिर क्या था इन्होंने अपना सामान समेटा और महर्षि महेश योगी के आश्रम में ऋषिकेश पहुंच गए।

महर्षि महेश योगी का आश्रम ऋषिकेश में 18 एकड़ में राजाजी नेशनल पार्क में था जिसे चौरासी आश्रम कहते थे। उस समय महर्षि महेश योगी दुनिया में भारतीय योग कला व आध्यात्मिक दर्शन के नए आइकन के रूप में प्रसिद्ध थे।

ऋषिकेश पहुंच कर रॉक के इन महारथियों ने 40 के करीब गाने रचे अपने बैंड बीटल्स के लिए, एक से एक जबरदस्त जो बाद में बहुत बजे। कुछ समय बाद महेश योगी ने भी आश्रम अपने शिष्यों के साथ छोड़ दिया लेकिन बीटल्स के कारण आज भी यहां लोग आते रहते हैं और उस समय यह आश्रम काफी सुविधाओं से परिपूर्ण था बाद में 80 के दशक से यह एक खंडहर बन गया इस आश्रम की दीवारों पर जंगली बेल झाड़ियां चढ़ने लगी बीटल्स के यहां आने के कारण विदेशी सेनानियों का आवागमन यहां बढा।

हिमालय की गोद में बसे ऋषिकेश के इस आश्रम में बीटल्स के जाने के बाद भी यहां की दीवारों पर लिखें बीटल्स के फैंस के मैसेज के कारण आज भी हम बीटल्स को अपने बीच ही पाते हैं। इस आश्रम पर कई कलाकृतियां बनी हुई हैं लेकिन इसकी हालत देखकर कोई नहीं कह सकता कि यहा दुनिया के सबसे मशहूर पॉप ग्रुप ने कभी कुछ दिन गुजारे थे और अपनी नई धुनें बनाई थी।

2003 से यह इलाका वन विभाग के क्षेत्र में शामिल कर लिया गया फिर धीरे-धीरे इसे खोलने पर विचार शुरू हुए आखिरकार 8 दिसंबर 2015 को इस आश्रम को सैलानियों के लिए खोल दिया गया।

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11. विश्वनाथ मंदिर (Vishwanath Mandir)

ऋषिकेश-गंगोत्री मार्ग पर स्थित विश्वनाथ मंदिर इस क्षेत्र के सबसे पूजनीय एवं प्राचीन पावन मंदिर है। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो भगवान शिव को समर्पित है। माना जाता है आरम्भ में इस मन्दिर की स्थापना परशुराम जी द्वारा की गई थी, उन्होंने यहाँ पर लम्बे समय तक तपस्या की थी।

आधुनिक समय में इस मंदिर के निर्माण का श्रेय गढ़वाल के नरेश प्रदयूम शाह को जाता है, जिन्होंने 17 वी शताब्दी के आस-पास इस शिव मंदिर को फिर से पुनर्जीवित किया। विश्वनाथ मंदिर की शोभा है यहाँ मौजूद त्रिशूल और प्राचीन शिवलिंग जो वर्ष भर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने रहते है।

विश्वनाथ मंदिर में उपस्थित इस त्रिशूल की लम्बाई 8 फुट 9 इंच है एवं ऊँचाई 26 फीट है। प्राचीन शिवलिंग की ऊँचाई लगभग 56 सेमी० है जिस पर श्रद्धालु बड़ी ही श्रद्धा से जलाभिषेक करते है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहाँ शिवभक्तों एवं पर्यटकों का ताता लगा रहता है। यदि आप प्राचीन मंदिरों को देखने में दिलचस्पी रखते है एवं भगवान में विश्वास रखते है तो आपको एक बार यहाँ घूमने अवश्य आना चाहिए।

उत्तराखंड घूमने का सही समय

हम में से कई लोग किसी पर्यटन स्थल पर जाने से पहले यह अवश्य पता करते है कि वहा घूमने का सही समय क्या है? उत्तराखंड जाने के लिए आपको सही समय देखने की ज्यादा जरुरत नहीं होगी क्योंकि यहाँ पर वर्ष भर कभी भी आ सकते है।

मई से जुलाई में तापमान कुछ गर्म जरूर रहता है तो आप गर्मी से बचने के लिए किन्ही अन्य महीने में आ सकते है। दिसम्बर तथा जनवरी के महीने में यहाँ ठण्ड बहुत पड़ती है उत्तराखंड के कई इलाको जैसे नैनीताल, औली तथा मसूरी आदि शहरो में आपको बर्फ भी देखने को मिल जाती है।

अत: हम कह सकते है इस राज्य में घूमने के लिए हमे उत्तराखंड घूमने का सही समय देखने की जरुरत नहीं क्योंकि यहाँ किसी भी समय में आकर पर्यटन का आनंद उठाया जा सकता है।

FAQ (उत्तराखंड के बारे में सवाल-जबाब)

उत्तराखंड घूमने में कितना खर्चा आएगा?

उत्तराखंड वैसे तो एक सस्ता प्रदेश है फिर भी यदि आप यहाँ 5 से 7 दिन गुजारने की सोच रहे है तो 20 से 22 हजार रूपये का खर्चा करके अच्छे से पुरे प्रदेश में घूम सकते है.

उत्तराखंड में घूमने लायक जगह कौन कौन सी है?

उत्तराखंड में नंदा देवी, केदारनाथ, बद्रीनाथ, लक्ष्मण झूला, स्नो व्यू पॉइंट आदि कई खूबसूरत जगह देखने लायक है.

उत्तराखंड की फेमस चीज क्या है?

उत्तराखंड के पर्यटन स्थल तो फेमस है ही साथ में यहाँ के व्यंजन जैसे भांग की चटनी , अरसा, फाणु का साग, मंडवे की रोटी, बाड़ी तथा चैसोनी आदि फेमस है.

आज हमने क्या जाना?

आज हमने उत्तराखंड में घुमने की जगह (Uttarakhand Tourist Places in Hindi) के इस लेख में उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी प्राप्त की। हमने उत्तराखंड के एतिहासिक स्थल, उत्तराखंड के प्रसिद्ध स्थान तथा उत्तराखंड का इतिहासउत्तराखंड जाने का सही समय के बारे में संक्षेप में जाना।

उम्मीद करते है आपको यह लेख बेहद पसंद आया होगा। पोस्ट पढने के लिए धन्यवाद, इस जानकारी को किसी और से साझा करना ना भूले एवं कमेंट में इस आर्टिकल के बारे में अपने विचार अवश्य बताये।

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