[मेडिटेशन] ध्यान क्या है, खुशहाल जीवन के लिए क्यों है जरूरी | Meditation in Hindi, Tips Benefits, Dhyan

ध्यान क्या है (Meditation in Hindi) ध्यान कैसे करे, उद्देश्य, फायदे (Dhyan Kya Hai, Meditation Benefits, Purpose and Tips, Dhyan in Hindi)

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ध्यान क्या है – Meditation in Hindi

इस बात से हम में से कोई इंकार नहीं कर सकता कि अब ज़िन्दगी में वो पहले वाले मजे नहीं रहे। जैसे-जैसे हमारा जीवन आधुनिक हो रहा है, हमारे हाथों में टेक्नोलॉजी आती जा रही है, वैसे- वैसे हमारे दिमाग पर तनाव एवं परेशानियों आदि का बोझ बढ़ता जा रहा है। अब ना खेलने में पहले जैसा मजा है, ना कही जाने में और ना ही अपनों के साथ मौज-मस्ती करने में । क्या आप भी ऐसा ही महसूस करते है?

मुझे तो हर पल ऐसा लगता था जैसे तनाव, स्ट्रेस आदि से मेरा सिर फट जायगा। सुबह उठने के साथ ही में बेबजह गुस्से में रहता, ऐसा लगता जैसे कुछ बहुत बड़ा मिल जायगा और मैं खुश हो जाऊंगा, लेकिन में खुश नहीं हुआ।

फिर मैंने कही से मेडिटेशन या ध्यान क्या है और इस से हजार जिम्मेदारियों के होते हुए भी हमारे मस्तिष्क को शांति कैसे मिल सकती है सीखकर, अपने जीवन में मैडिटेशन या ध्यान को सम्मलित किया।

यकीन माने आज भी मेरे ऊपर वो सभी जिम्मेदारियां है जो पहले थी लेकिन अब सभी दायित्व की पूर्ति में एक मुस्कराहट के साथ एवं नयी उर्जा के साथ करता हूँ।

आज मैं आपको अपने ध्यान के अनुभव के बारे में बताऊंगा जिस से आपके जीवन को अवश्य ही एक ने दर्शन मिलेगा। आइये जानते है ध्यान क्या है / Dhyan Kya Hai (Meditation in Hindi) तथा इसे उपयुक्त एवं सरल तरीके से अपने जीवन में शामिल करके क्या लाभ प्राप्त कर सकते है?

Table of Contents

ध्यान क्या है / Dhyan Kya Hai (Meditation in Hindi)

ध्यान एक ऐसी क्रिया है जो हमे हमारी चेतना से जोड़ती है तथा अनुभूति कराती है कि सब कुछ एक है। ध्यान की ऐसी परिभाषा सुनकर आप थोड़ा असहज हो सकते है लेकिन यह सच है जैसे हम इस आर्टिकल में आगे बढ़ेंगे तो जानेंगे कि मैडिटेशन क्या है असल में तथा इसका ख़ुशी से क्या सम्बन्ध है?

मैंने बहुत से लोगो को देखा है जो यह जाने बिना कि मेडिटेशन या ध्यान क्या है, इसे करना शुरू कर देते हैं। यह तो वही बात हुई ना क्रिकेट के बारे में जाने बिना कि इसे बल्ले और गेंद से खेला जाता है आप फुटबॉल लेकर क्रिकेट के मैदान में पहुँच जाओ। इसी प्रकार मैडिटेशन को जाने बिना कभी भी मैडिटेशन की शुरुआत न करे।

मेरे अनुसार तो ध्यान एक क्रिया न होकर एक दिनचर्या है क्योंकि यह तो हर-दिन एवं जीवन भर हमारे साथ हर पल रहनी चाहिए। या तो आप उस ध्यान के लिए जा सकते है जो आपको कुछ मिनट के लिए शांति प्रदान करे या फिर उस ध्यान के लिए जो जीवन पर्यंत आपके साथ रहे।

उम्मीद है नीचे दिया गए बिन्दुओ से आपको स्पष्ठ हो जायगा कि Meditation Kya Hai तथा इसके बाद आप मेडिटेशन के सही रूप की ओर अपनी रूचि बढ़ा सकते हो

  • हम सभी ध्यान या मैडिटेशन की ओर इसलिए आकर्षित होते है क्योंकि हमारा मन व्याकुल है। तो हम कह सकते है है व्याकुल मन को एकाग्र करना मेडिटेशन है।
  • मन में चल रहे अनगिनत विचारो पर रोक लगाना या रोक लगाने की कोशिश करना।
  • स्वयं को समझने पर केन्द्रित होना
  • विचार कैसे कार्य करते है इसे भलीभांति समझना।
  • हमारी सोच से हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा इसे देखना एवं इस पर एकांत में बैठ कर मनन करना।

मै आशा करता हूँ अब आपको ध्यान क्या है (Dhyan Kya Hai or Dhyan in Hindi) इस बारे में थोड़ी स्पष्ठता मिल गयी होगी। बहुत से लोग सुबह को जल्दी उठकर आँखे मूँद कर बैठने को ही मेडिटेशन समझते है। परन्तु असलियत में ऐसा नहीं है हाँ आँखे बंद करके बैठना मैडिटेशन की एक क्रिया हो सकती है पर इतने भर से आप ध्यान करने में परिपूर्ण नहीं हो जाते।

आपको ऊपर बताई गयी ध्यान क्या है की ये परिभाषा कुछ विचित्र अवश्य लग सकती है लेकिन खुद विचार कीजिये यदि आप ध्यान की इन परिभाषाओं के अनुरूप चल पाए तो आपका जीवन कैसे खुशियों से भर उठेगा तथा सब कुछ अच्छा लगने लगेगा।

ध्यान करने का उद्देश्य (Purpose of Meditation in Hindi)

यदि आपने जान लिया है कि मेडिटेशन क्या है तो उसके बाद प्रश्न आता है मैडिटेशन करनी क्यों है?

अब आप सोचेंगे कि यह क्या प्रश्न है कि ध्यान क्यों करना है। बड़ा साधारण है कि ध्यान तो हमे मन की शांति के लिए करना है। लेकिन ऐसा नहीं है जब तक आप अपने लिए मैडिटेशन का उद्देश्य निश्चित नहीं कर लेते आप इसके अधिक लाभ नहीं उठा पायेंगे।

जब मैंने ध्यान करना आरम्भ किया था तो सबसे प्रथम सवाल स्वयं से यही पूछा आखिर मेरे लिए मेडिटेशन का उद्देश्य क्या है? क्यों है मुझे इसकी आवश्यकता? मेरे खुद से प्रश्न पूछने पर कुछ उत्तर मिले और उनके मुताबिक मैंने ध्यान को अपनी दिनचर्या बनाया।

नीचे मेरे द्वारा ध्यान करने के उद्देश्य के सम्बन्ध में कुछ पूछे गए प्रश्न अंकित है इन प्रश्नों की बजह से मैंने कभी ध्यान करना नहीं छोड़ा। आइये जानते है मैडिटेशन करने के उद्देश्य पूछे जिन्होंने मेरी एक उद्देश्य का चुनाव करने में बहुत सहायता की शायद ये आपके लिए भी लाभप्रद साबित हो

  • मै अपने जीवन में पहले जैसी ख़ुशी महसूस नहीं करता, इसलिए में ध्यान करके खुश होना चाहता हूँ।
  • तनाव बहुत रहता है इसलिए कुछ समय के लिए तनाव से मुक्त होना चाहता हूँ
  • अपनी केन्द्रित रहने की क्षमता (Concentration Power) को बढ़ाना चाहता हूँ। क्योंकि केन्द्रित रहने से पढ़ाई तथा कार्य बेहतर ढंग से हो पाते है।
  • दिमाग में हमेशा विचार चलते रहते हैं कुछ समय के लिए रोककर तरोताजा महसूस करना चाहता हूँ।
  • स्वयं को समझना चाहता हूँ।
  • हमेशा के लिए एकाग्र होकर अपनी जीवन शैली में सदा के लिए प्रसन्नता एवं हर्षौल्लास शामिल करना चाहता हूँ।
  • जीवन में मुक्ति के मार्ग पर चलना चाहता हूँ ताकि ज़िन्दगी को समझ सकू तथा अपने परिवार के साथ रहकर हर पल का आनंद उठा सकूँ।

मैडिटेशन शुरू करने से पहले मैंने इसका उद्देश्य जानने के लिए खुद से ये सात सवाल पूछे। अब मुझे इन सवालों में से ध्यान करने का एक या दो उद्देश्य चुनने थे।

आपको क्या लगता है मैंने कौनसे उद्देश्य चुने होंगे, मैंने अंतिम दो उद्देश्यो का चुनाव किया। मैंने मैडिटेशन करने के इन उद्देश्यों पर बहुत ध्यान दिया तथा इसे अपने जीवन का एक अभिन्न अंग बना लिया।

यहाँ एक बात गौर करने की है जैसा आप उद्देश्य चुनते है वैसा ही आपको प्रयास करना होगा। यदि पहले तथा चौथे उद्देश्य को चुनकर कुछ समय के लिए शांति चाहते हो तो उसमे ज्यादा प्रयास की आवश्यकता नहीं। लेकिन कोई बड़ा प्रयोजन का चुनाव करने पर प्रयाद भी अधिक ही होंगे।

मैडिटेशन/ध्यान के भिभिन्न रूप (Types of Meditation in Hindi)

जैसा की हमने ऊपर इस लेख में चर्चा की है ध्यान करने की कोई एक पद्धति नहीं है। ध्यान करने के अनेक प्रकार होते है तथा प्रकारों के अनुसार ही मैडिटेशन करने के परिणाम भी अलग होते हैं। चलिए मेडिटेशन करने के भिभिन्न रूपों के बारे में जानते है आप अपनी सुविधा अनुसार कोई भी रूप चुनकर ध्यान करना शुरू कर सकते हैं।

1. आध्यात्मिक मैडिटेशन (Spiritual Meditation)

अध्यात्मिक मैडिटेशन को सबसे प्राचीन मैडिटेशन कहा जाता हैं, इस मैडिटेशन या ध्यान का प्रभाव आपको सबसे अधिक हिन्दू धर्म में देखने को मिलता हैं। सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) से सीखकर ही इस ध्यान की क्रिया को ईसाई धर्म में अपनाया गया। आध्यात्मिक मेडिटेशन को हिन्दू एवं ईसाई दोनों धर्म में बहुत अधिक ख्याति प्राप्त हैं।

इस ध्यान का अभ्यास करने के लिए आपको शांत स्थान पर बैठना है एवं अपनी साँसों पर ध्यान केन्द्रित करना होता हैं।

2. ज़ेन मैडिटेशन (Zen Meditation)

जेन मैडिटेशन को अधिकतर बोद्ध धर्म को मानने वाले लोग करते नजर आएंगे। इस ध्यान का परम उद्देश्य होता हैं स्वंय को तनाव आदि से मुक्त करना एवं अपनी समझ को विकसित करना। इस मैडिटेशन को सीखने के लिए एक विशेषज्ञ की आवश्यकता पड़ती हैं।

3. सचेतन मैडिटेशन (Mindfulness Meditation)

जैसे की इस मेडिटेशन के नाम से ही इसका अर्थ स्पष्ठ हो जाता हैं सचेत करना। माइंडफुल्नेस ध्यान का उद्देश्य होता है लोगो को वर्तमान में जीना सिखाना। इस मैडिटेशन को सीखकर हम हर पल को गुजरता हुआ महसूस करते हैं एवं जीवन का छोटे से छोटे क्रिया कलाप पर ध्यान देते हैं।

यहाँ मैंने आपको सिर्फ तीन मैडिटेशन के प्रकारों के बारे में बताया हैं। मेरा यकीन माने यदि आप इन तीनो में से किन्ही दो को भी भली-भांति सीख लेते है आपको किसी एनी तरह की मैडिटेशन की जरुरत नहीं पड़ेगी।

आज हम जिस मैडिटेशन या ध्यान की वार्ता कर रहे है वो उपरोक्त वर्णित तीनो मैडिटेशन का मिला-जुला रूप हैं। आप आगे ध्यान कैसे करे के तरीको को जानेंगे केंरे लगेंगे आप इन सभी मैडिटेशन में स्वंय ही सम्मलित हो जायेंगे।

ध्यान कैसे करे (Dhyan Kaise Kare)

Meditation Kya Hai या Dhyan Kya Hai यह जानने का हमारे लिए कोई फायदा नहीं यदि हमे Dhyan Kaise Kare यह नहीं आता। ध्यान या मैडिटेशन कैसे करे यह ज्ञात होना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

मै ध्यान करने का जो तरीका यहाँ बताने जा रहा हूँ कोई जरूरी नहीं है कि वह आपके लिए अवश्य काम करेगा। हो सकता है आपके लिए मुझसे भी अच्छी तरह काम कर जाये, आप मैडिटेशन बहुत अच्छे ढंग से करने लगो। कोई भी तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसे समझते कैसे है तथा उस पर कितना अम्ल करते है।

मै आपको बिल्कुल वही बताऊंगा जो मैं करता हूँ। सबसे पहले आपको ईअर प्लगस (बाहर की आवाज को रोकने वाले कानो में लगाने वाले प्लगइन) लेनी हैं। यदि अभी ईअर प्लगइन नहीं है तो आप रुई से काम चला सकते है लेकिन रुई उतने अच्छे से बहार की आवाज को नहीं रोक पाती। आप ईअर प्लगइन को किसी भी मेडिकल स्टोर से 15-20 रूपये में खरीद सकते हैं। चलिए जानते है Meditation Kaise Kare.

१. सबसे पहले आपको किसी थोड़े शांत वातावरण में बैठ जाना है तथा दोनों कानो में रुई या ईअर प्लगइन ठीक प्रकार से लगा लेने है ताकि कानो में वाह्य शोर-गुल कम ही सुनाई दे।

२. आवश्यक नहीं कि आप पालती में बैठकर बैठे, जिस भी आक्रति में आप अधिक सहज महसूस करते है आप उस मुद्रा में बैठे। याद रखे आप जिस मुद्रा में बैठे हो उसमे इतना आराम हो कि आपकी शारीरिक हलचल कम से कम हो।

३. अपनी सहज मुद्रा में बैठकर आपको आँखे बंद कर लेनी है या किसी विशेष चीज पर अपनी द्रष्टि बनाये रखनी है। आप जिस भी चीज को देख रहे है उसके बारे में कुछ सोचना नहीं है। हाल हीमें मैडिटेशन आरम्भ करने वालो लोगो के लिए उपयुक्त यही होता है कि वे अपने नेत्र बंद ही रखे।

४. अपने नेत्र बंद करने के बाद आपको अपने विचारो को देखना। आपको देखना है, आपके दिमाग में चल क्या-क्या रहा है। याद रखे आपको इन विचारो को रोकने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं करनी है।

५. बस आप केन्द्रित होकर उन विचारो को देखते रहे, कुछ समय बाद आप पाएंगे कि मस्तिष्क में विचार चलने बहुत ही कम हो गए है। आपको ऐसा प्रतिदिन करना है तथा धीरे-धीरे कुछ समय बाद आप यह सब बिना कानो में रुई लगाये किस भी स्थान पर बैठकर कर सकते है।

६. आप चाहे तो बस इतना कर सकते है इस से आगे जाने की आपको शायद जरूरत महसूस न हो। इतना करने पर ही आपके मन में विचार चलने की गति कम हो जाएगी तथा स्ट्रेस आदि में भी कमी आयेगी। लेकिन जो लोग ध्यान की उच्चतम सीमा तक पहुँचना चाहते है वो आगे के चरणों (Steps) का अनुसरण कर सकते है।

७. जब आपके मन में विचार चलने न्यून हो जाये या बिलकुल भी विचार ना हो, तब आपको अपने शरीर में एक आवाज की ओर ध्यान देना है। थोडा ध्यान देने पर आपको अपने शरीर के भीतर एक धीमी आवाज जैसे कोई भँवरे की ध्वनि आती सुनाई देगी।

८. यहाँ आपको यह नहीं सोचना है कि यह ध्वनि कहाँ से और क्यों आ रही है? बस आपको इसे सुनते रहना है और महसूस करना है कि हर व्यक्ति में यह ध्वनि मौजूद हैं।

९. जैसे-जैसे आप प्रतिदिन इस ध्वनि या आवाज को सुनते रहते है आप पाएंगे कि यह ध्वनि ही परमात्मा का स्रोत है। तथा यह आवाज हर किसी में समाहित है इसलिए ही कहाँ जाता है कि सभी में ईश्वर वास करते हैं।

१०. इस अवस्था में आकर आपका ध्यान काफी गहन हो जायेगा, यहाँ आकर आपको रूकना नहीं है। खुद से तार्किक सवाल जैसे मैं कौन हूँ आदि लगातार पूछते जाना है। जिस दिन आपको इस सवाल का जबाब मिल जायगा,आप सच्ची ख़ुशी का अनुभव कर सकेंगे।

मैंने आपको Dhyan Kaise Kare या Meditation Kaise Kare के इस लेख में ध्यान करके विचारो को रोकने का तरीका बताया हैं तथा आपके साथ ध्यान या मैडिटेशन के उच्चतम शिखर तक पहुँचने का मार्ग भी साझा किया है।

अब यह आप पर निर्भर करते है कि आप मैडिटेशन कैसे करते है तथा इसे करने से आप क्या पाना चाहते हैं। मुझे आंतरिक प्रसन्नता चाहिए थी इसलिए मै इस मार्ग पर बहुत आगे तक गया, थोड़े से प्रयास से आप भी ऐसा करने में सफल हो सकते है।

मैडिटेशन करने की कुछ महत्वपूर्ण टिप्स (Tips to do Dhyan in Hindi)

वैसे तो मैंने ध्यान कैसे करे वाले पैराग्राफ में पूरी तरह से बतलाया है कि मेरे मैडिटेशन करने का क्या तरीका होता हैं। फिर भी मैं आपसे मेडिटेशन करने की कुछ टिप्स के बारे में बात करूँगा जो आपके निश्चित ही ध्यान में मदद करेगी।

i. समय सुनिश्चित करे

आपकी जानकारी के लिए बता दू मैंने कभी मैडिटेशन करने के लिए किसी समय का निर्धारण नहीं किया। मुझे जब भी समय मिला और जब भी लगा कि ध्यान करना चाहिए मैंने किय। लेकिन जो अभी Meditation Kaise Kare के पहले पड़ाव पर मतलब जो शुरू करने वाले है या जिन्होंने अभी शुरुआत की है उनके लिए मैडिटेशन का एक समय निर्धारित करना बढ़िया रहेगा।

जब हम मैडिटेशन का समय निश्चित करने लेते है तो हमारे दिमाग में एवं शरीर की क्रियाओ में यह रहता हा कि हमे इस समय मैडिटेशन करनी है। समय निश्चित करने से आप ध्यान को ना चाहते हुए भी करते है एवं धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाती है। ध्यान करने के सबसे अच्छे समय सुबह जल्दी उठकर या देर रात में करने के है। प्रातः काल में एवं रात्रि में शोरगुल कम रहता है तो मैडिटेशन अच्छे से की जा सकती है।

ii. उपयुक्त वस्त्रो में मैडिटेशन करे

जब मैंने ध्यान करना आरम्भ किया था तब अधिक कपड़ो के बारे में नहीं सोचा, कभी में जींस में मैडिटेशन करता और कभी टाइट लोअर में। लेकिन ऐसे वस्त्रो में कभी भी मैंने सहज महसूस नहीं किया इसलिए मैंने थोड़े ढीले एवं हलके तथा सफेद रंग के कपड़ो में मैडिटेशन करने लगा।

आप यकीन मानिये मुझे इसका आभास भी नहीं था कि सही कपड़ो के चुनाव से मैडिटेशन करना इतना शुगम हो जायगा। आप भी अपने अनुसार थोड़े ढीले कपड़े पहनकर ध्यान करना शुरू करे।

iii. सही स्थान का चुनाव

यह एक ऐसी चीज है जिस पर लोग अधिक ध्यान नहीं देते, परन्तु आप कहाँ मैडिटेशन कर रहे है इस से बहुत फर्क पड़ता है। मेरा यहाँ स्थान से मतलब सिर्फ किसी उद्यान में या कक्ष में बैठकर ध्यान करने से नहीं है बल्कि धरती पर बैठकर मैडिटेशन करने से भी है।

आप चाहे तो किसी उद्यान में बैठकर ध्यान करे या किसी कमरे में इस से अधिक फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आपको जमीन पर चटाई या कोई कपड़ा विछाकर मैडिटेशन करनी है। मैंने कुछ लोगो से सुना है कि वो पलंग पर बैठकर या कुर्सी पर बैठकर मैडिटेशन करते है। यकीन माने प्रथ्वी में रहकर प्रथ्वी से जुड़े बिना मैडिटेशन करना उतना अच्छा परिणाम नहीं ला सकता।

iv. ध्यान के लिए सही मुद्रा

इस बात पर सबसे अधिक चर्चा होती है कि मैडिटेशन के लिए सबसे उपयुक्त मुद्रा कौन सी है। किस तरह बैठने से हमे ध्यान करने का अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो। वैसे तो ध्यान करते वक्त पालती लगाकर बैठने की सलाह ही सबको दी जाती है लेकिन आप अपनी सहूलियत के अनुसार भी अपनी मुद्रा तय कर सकते है। बस इतना याद रखना है मुद्रा कोई भी हो आपकी कमर बिल्कुल सीधी होनी चाहिए।

बस इस बात का स्मरण रखे आप जिस भी मुद्रा में बैठे उसमे आपका शरीर पूरी तरह से आजाद सा महसूस करना चाहिए। इस प्रकार बैठे कि आप उस मुद्रा में थके नहीं तथा ध्यान करते वक्त हिलने की आवश्यकता ना हो।

मैडिटेशन करने के लिए इन टिप्स का अवश्य ही अनुसरण करे ताकि आप आरम्भ से मैडिटेशन में रूचि प्राप्त कर सके। बहुत लोग मैडिटेशन करना इसलिए छोड़ देते है क्योंकि उनको यह बोरिंग लगता है, तथा यह बेहद ही हँसी की बात है कि इन लोगो को ध्यान, जीवन आदि को समझे बिना बोरिंग तरह से ज़िन्दगी गुजरना बुरा नहीं लगता।

मेडिटेशन के क्या फायदे हैं? (Meditation Benefits in Hindi)

यदि हम मेडिटेशन के बारे में इतना जान रहे है, इसे करने जा रहे है तो निश्चित रूप से इसे करने के लाभ तो होंगे ही। आइये बात करते है प्रतिदिन ध्यान मगन रहने से हमे किन लाभों की प्राप्ति हो सकती हैं।

  • ऐसे बहुत व्यक्ति होते है जो हमेशा चिड़चिड़े रहते है थोड़ी सी बात पर उनको गुस्सा आने लगता हैं। ऐसे लोगो को ध्यान करने के साथ ही अपने चिड़चिड़े स्वभाव में कमी अनुभव होगी।
  • आजकल की इस भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में तनाव बहुत ज्यादा है। हर इन्सान स्ट्रेस में घिरा नजर आता है तनाव आदि व्याधि को दूर करने के लिए आप मैडिटेशन का सहारा ले सकते है। तनाव को कम करने एवं पूरी तरह मिटाने में ध्यान बहुत अधिक उपयोगी हैं।
  • जो व्यक्ति हमेशा नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है, जिसे जीवन के किसी भी रूप में सकारात्मकता नहीं दिखाई देती। ऐसे नकारात्मक उर्जा से भरे इंसानों के लिए मैडिटेशन एक वरदान साबित हो सकती है।
  • वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से देखे तो जो लोग नियमित रूप से मेडिटेशन करते है उनका स्वास्थ्य बहुत बेहतर रहता हैं।
  • ध्यान करने से स्वास्थ्य अच्छा होता है एवं मन को शांति की प्राप्ति होती है इस बात पर वैज्ञानिको ने भी मोहर लगा दी है। जो व्यक्ति कुछ भी शुरू करने से पहले विज्ञान की प्रमाणिकता चाहते है वो भी अब मेडिटेशन की शुरुआत कर सकते है।
  • ध्यान करने से अनेक स्वास्थ्य लाभों के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती हैं।
  • जब पुराने काल में हमारे देश में विद्यार्थियो के पठन-पठान के लिए गुरुकुल हुआ करते थे तब गुरु शिष्यों को ध्यान करने की ही सलाह दिया करते थे। ध्यान करने से ना सिर्फ याद करने की शक्ति बढती है बल्कि तार्किक क्षमता का भी विकास होता है।

हमने Meditation Benefits in Hindi के पैराग्राफ में बहुत सारे लाभों के बारे में बात की। मेडिटेशन करने के इस से भी अधिक लाभ है लेकिन जो मैडिटेशन दिल से करना चाहते है उनके लिए ये फायदे ही काफी है। नहीं तो मैडिटेशन करने के लाखो फायदे बताने के बाद भी जिसकी चाहत नहीं हुई वो मेडिटेशन शुरू नहीं करेगा।

ध्यान की शुरुआत करते वक्त स्वयं से कहे ये बाते (Meditation Quotes)

मैडिटेशन में लीन हो जाने के लिए जरूरी है कि आपका मन पूरी तरह से शांत हो। खुद को सकारात्मक उर्जा से भरने के लिए हमे स्वंय से कुछ बाते कहनी है। नीचे कुछ सकरात्मक बाते है जिन्हें ध्यान की मुद्रा में बैठकर दोहराना आवश्यक है

हे परमेश्वर, इस संसार को प्रकाशमान करने वाले में तेरी शरण में आ रहा हूँ। मैं तेरा ही अंश हूँ और तुझसे ही निरंतर जुड़ता जा रहा हूँ।

ये दुनिया जो तूने बनाई है पूरी तरह से पूर्ण है। मैं तेरी बनायीं इस दुनिया से पूरी तरह से खुश हूँ, इस संसार में रहने वाले हर एक इन्सान व जीव से खुश हूँ।

मेरी किसी से दुश्मनी नहीं, बस कुछ कर्तव्यों की पूर्ति के लिए कुछ इंसानों का निडरता से सामना करना पड़ता है तथा लडाईयां भी लड़नी पड़ती है। लेकिन उसमे किसी को हानि पहुचने के मेरा कभी उद्देश्य नहीं होता बस खुद को हानि से बचाने का प्रयास होता है और इसमे कुछ गलत भी नहीं।

मैं हर एक इन्सान में शांति का अनुभव कर रहा हूँ तथा वही शांति अपने अन्दर भी महसूस कर रहा हूँ जिस कारण में शांतिमय होता जा रहा हूँ।

मेरे मस्तिष्क में चल रहे विचार धीरे-धीरे गायब हो रहे है, मेरे मन के हर कोने में शांति छा रही है।

अब मेरा मन पूरी तरह से शांत हो रहा है, अब मेरा मन पूरी तरह से शांत हो रहा है, अब मेरा मन पूरी तरह से शांत हो गया हैं।

बस आपको इतना कहना है तथा इतना कहकर चुप हो जाना है। ऐसा करने पर आप एक ऐसी अवस्था में पहुँच जाते है जहाँ शांति के सिवा कुछ नही है। आप जितनी देर तक भी इस अवस्था में सहज रूप से रह सकते है उतनी देर तक रहे। जब आपको ध्यान करते हुए कुछ दिन हो जाये तो आप महसूस करेंगे कि आपके अन्दर एक भँवरे जैसी आवाज आ रही है। आप चाहे तो इस ध्वनि को पकड़कर मैडिटेशन कर सकते हैं।

यदि आप स्वयं को जानना चाहते है तो अपनी आंतरिक ध्वनि के साथ-साथ खुद से निरंतर यह प्रश्न करते रहे “मैं कौन हूँ”? निरंतर अभ्यास करने के बाद एक दिन ऐसा आयेगा जिस दिन आप खुद को समझ जायेंगे एवं आपकी हर परेशानी तथा दुःख आपके लिए गौण हो जायेंगे।

हमे कैसे पता चलेगा कि हम ध्यान में सही दिशा में जा रहे है? (Right Way)

मैडिटेशन करना ही पर्याप्त नहीं है, हमे यह भी देखना है मैडिटेशन हमे किस प्रकार लाभान्वित कर रहा है। यदि हम थोडा विश्लेषण करने पर पाते है कि ध्यान से हमे कुछ फायदा नही हो रहा है तो समझ लेना चाहिए हम ध्यान में सही दिशा में नहीं जा रहे है।

ध्यान की सही दिशा जानना बहुत ही सरल है बस आपको अपने स्वभाव की जांच-पड़ताल करते रहना है। देखे कि आपका तनाव कम हुआ है, आप पहले से अधिक खुश रहने लगे है, आप छोटी बातो की ज्यादा चिंता नहीं करते या आपके चिड़चिड़े में भरी कमी आई हो।

यदि ऐसा कुछ हुआ है या हो रहा है तो निरंतर उसी प्रकार मेडिटेशन करते है। अगर अधिक सकारात्मक परिणाम नहीं मिले है तो थोड़ा धैर्य रखे, अशांत मन को शांत होने में कुछ वक्त तो लगता ही है।

मेडिटेशन के बारे में कुछ मिथक (Misconception about Meditation in Hindi)

हर क्रिया को करने के कुछ न भ्रम या मिथक बन जाते है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किसी भी अवस्था को प्राप्त करने के लिए एक रास्ता तो होता नहीं, जो जिस रास्ते से ध्यान को करने लगता है वह अन्य रास्तों को बेकार या निष्फल मान लेता हैं। आइये जानते है कुछ मिथक जिनके बारे में कहा जाता है इन्हें करे बिना या न करे बिना मेडिटेशन नहीं की जा सकती।

  • बहुत से लोगो का यह पूर्ण विश्वास होता है कि ध्यान आँखे बंद किये बिना नहीं किया जा सकता। ऐसा पूर्णतया: सत्य नहीं है हाँ आपको शुरुआत में ध्यान करते समय नेत्रों को बंद करने की आवश्यकता अवश्य पद सकती है। लेकिन एक बार मैडिटेशन करने में मास्टर हो जानते पर यह आप पर निर्भर करता है कि आप मेडिटेशन के वक्त नेत्र मूंदते है या नहीं।
  • मैंने बहुत से लोगो को देखा है जो मैडिटेशन करते हुए हल्का संगीत बजा लेते है या कोई धुन बजा लेते है। यदि मैं आपको अपना अनुभव बताऊ तो मैं मैडिटेशन करते हुए बिल्कुल शांति में रहना पसंद करता हूँ। इसलिए आपके लिए भी कोई जरूरी नहीं कि कोई धुन बजायी जाये, बल्कि बिना किसी शोर के ध्यान लगाना अधिक आसान होता हैं।
  • ध्यान में जो सबसे अधिक चर्चा का केंद्र रहता है वह है बैठने की सही मुद्रा का चुनाव। मैं तो पालती लगाकर ही बैठा परन्तु आप जिस भी आक्रति में सहज हो उसी में ध्यान करना शुरू करे। यहाँ एक बात याद रखने की है मुद्रा कोई भी हो बस आपकी रीड की हड्डी सीढ़ी होनी चाहिए क्योंकि बिना रीड की हड्डी सीधे रखे आप शरीर के अंगो को शांत नहीं कर सकते जिस बजह से ध्यान करने में दिक्कत आ सकती हैं।
  • आपने अवश्य ऐसे लोग देखे होंगे जो मेडिटेशन करते समय कुछ न कुछ मंत्र कहते रहते है। इसमें कोई संदेह नहीं कि मंत्रो से हमे लाभ नहीं होता। मंत्रो की शक्तियो ने तो राक्षसो तक को देवताओ की शक्ति प्राप्त करा दी थी। परन्तु मैडिटेशन करते हुए मंत्रो का जाप करना बिल्कुल भी आवश्यक नहीं। ध्यान में तो हम विचारो एवं बोलने से जितना शांत रहे उतना बेहतर हैं। हाँ आप मंत्रो के उच्चारण के लिए अलग से समय जरूर निकाले, क्योंकि मन की शुद्धि में इनका बहुत सहयोग हैं।
  • आपमें से बहुत लोग ऐसे हो सकते है जो धुम्रपान करते हो या माँस खाते हो। काफी बुद्धिजीवी कहते है कि धुम्रपान करने वाले, शराब का सेवन करने वाले एवं माँस खाने वाले व्यक्तिओ को ध्यान नहीं करना चाहिए। मेरा मानना हैं इन सब चीजो का सेवन करने वालो को तो ध्यान अवश्य करना चाहिए। हो सकता है उन्हें नित्य ध्यान करने से ही समझ आ जाये कि इन सब चीजो का सेवन करने से उनका स्वास्थ्य एवं घर-परिवार की हालत बेकार हो रही है जिस कारण उनका मन अशांत हो रहा हैं और वे यह सब सेवन करना त्याग दे।

आपने उपरोक्त बिन्दुओ में मैडिटेशन करने के कुछ मिथक के बारे में जाना। आशा है आप किसी भी भ्रम के चक्कर में नहीं पड़ेंगे एवं सिर्फ ठीक प्रकार से ध्यान कैसे करे में अपनी उर्जा एवं समय का दोहन करेंगे।

FAQ (मेडिटेशन के बारे में कुछ सवाल-जबाब)

मेडिटेशन करने का सही तरीका क्या है?

मेडिटेशन करने के लिए आप किसी शांत स्थान का चुनाव करे एवं आखे बंद करके अपने विचारो पर ध्यान लगाये। विचारो को देखते रहने से सभी विचार गौण हो जायेंगे तथा आप ध्यान की मुद्रा में पहुँच जायेंगे।

मेडिटेशन कितनी देर करना चाहिए?

मेडिटेशन करने की कोई भी समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती। कोई व्यक्ति 10 मिनट इसे कर सकता तो कोई 4 घंटे भी। आप शुरू में थोड़े कम समय के लिए कीजिये एवं बाद में मेडिटेशन का समय बढ़ाते जाइये।

मेडिटेशन के क्या फायदे हैं?

मेडिटेशन या ध्यान करने के अनेक फायदे है जैसे मन की शांति, तनाव का कम हो जाना, खुश महसूस करना और एकाग्र हो जाना आदि।

आज हमने क्या जाना?

आज हमने Meditation in Hindi के इस लेख में मैडिटेशन के बारे में कई गहरी बातो को सीखा। आइये डालते है हमने क्या जाना इस पर एक नजर –

  • ध्यान क्या है (Dhyan Kya Hai या Meditation Kya Hai)
  • ध्यान कैसे करे (Dhyan Kaise Kare या Meditation Kaise Kare)
  • मेडिटेशन करने से क्या फायदा होता है? (Meditation Benefits in Hindi)
  • मैडिटेशन करने की टिप्स (Meditation Tips in Hindi)

तो आपने पढ़ा कि आज हमने ध्यान क्या है (Dhyan in Hindi) इसके बारे में भली-भांति जान लिया हैं! मुझे पूरा विश्वास है कि अब किसी को मैडिटेशन करने में अधिक समस्या नहीं आयेगी तथा सभी रूचि के साथ मेडिटेशन कर सकेंगे।

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