नैनीताल में 11 सुन्दर घूमने की जगह | Nainital Tourist Places in Hindi

नैनीताल में घूमने की जगह (Famous Nainital Tourist Places in Hindi) नैनीताल कब जाये, सही समय व कैसे जाये (When to Visit Nainital, Time, Nainital Tourist Visiting Places in Hindi)

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नैनीताल में घूमने की जगह – Nainital Tourist Places in Hindi

अगर आप किसी पहाड़ी क्षेत्र में घूमने की योजना बना रहे हैं लेकिन स्विट्ज़रलैंड नहीं जाना चाहते हैं तो आप अपने देश में ही स्विट्ज़रलैंड की तरह ही पहाड़ व झीलों का आनंद उठा सकते हैं। भारत में ही एक शहर है जिसे आप छोटा स्विट्ज़रलैंड तो कह ही सकते हैं, हम बात कर रहे है नैनीताल शहर की। भारत के उत्तराखंड राज्य में बसा यह खूबसूरत शहर अपनी हरी-भरी वादियों व शांत वातावरण के लिए हमेशा पर्यटकों को चहेता बना रहता हैं।

चाहे आप अपने साथी के साथ हनीमून ट्रिप की योजना बना रहे हो या दोस्तों के साथ या फिर परिवार के साथ हर किसी के लिए नैनीताल के आनंदमय एवं आकर्षक टूरिस्ट प्लेस हैं। आइये जानते है नैनीताल में घूमने की जगह व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल (Nainital Tourist Places in Hindi) के बारे में –

नैनीताल की जानकारी संक्षिप्त में (Nainital Brief History)

नैनीताल भारत के उत्तराखंड राज्य का एक जिला व शहर हैं। नैनीताल एक पहाड़ो व झीलों का शहर हैं इसलिए यह भारत के मुख्य पर्यटन स्थलों में से भी एक हैं। समुन्द्र तल से 1938 मीटर ऊपर बसा यह सुन्दर नगर 19 वी शताब्दी में अंग्रेजों द्वारा अपने फुर्सत के पलो को बिताने के लिए बसाया गया था। 2011 की जनसंख्या के अनुसार नैनीताल शहर में 85.61% हिन्दू, 11.91% मुस्लिम, 0.75% सिख, ईसाई 0.92% तथा अन्य आबादी निवास करती हैं।

पर्यटन शहर नैनीताल
स्थापना दिवस 18 नवम्बर 1841
राज्य उत्तराखंड
नैनीताल नाम क्यों पड़ा?नैनी झील के नाम पर
अधिकारिक भाषा हिंदी
क्षेत्रीय भाषा कुमाऊँनी
क्षेत्रफल 11.73 वर्ग किमी०
नैनीताल शहर की जनसँख्या लगभग 60 हजार
प्रमुख धर्म हिन्दू

नैनीताल का नाम नैनीताल क्यों पड़ा?

ईस्ट इंडिया कंपनी व नेपाल की गोरखा आर्मी के बीच 1814 से 1816 के बीच कुमाऊँ पर आधिपत्य स्थापित करने के लिए युद्ध हुआ जिसमे नेपाल को पराजित होना पड़ा। अब कुमाऊँ ब्रिटिश इंडिया के अधीन आ चुका था तथा अलग-अलग जगह पर अंग्रेजो द्वारा अपने फायदे के लिए बस्तियां बसाये जाने लगी। ऐसी ही एक बस्ती व कुछ निर्माण कार्य नैनी झील के समीप हुए। नैनी झील के पास बसाये गए अंग्रेजो द्वारा इस शहर को नैनी झील के कारण नैनीताल नाम दिया गया।

नैनीताल की खोज किसने की? (Who Discovered Nainital)

नैनीताल की खोज उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर के चीनी के ब्रटिश व्यापारी पीटर बैरन ने 18 नवम्बर 1841 में नैनी झील के आस-पास पहला यूरोपियन घर बनाकर की। कहा जाता है कि 1841 में इस इलाके पर दानसिंह थोकदार नामक स्थानीय निवासी का अधिकार था। पीटर बैरन को यह जगह बहुत पसंद थी, इसलिए उन्होंने दानसिंह से बड़ी चालाकी से यह जगह खारीदी थी। इसके बाद ही यहाँ अंग्रेजो द्वारा व कुमाऊँ क्षेत्र में रहने वाले लोगो ने निवास स्थान बनाने शुरू किये जिससे धीरे-धीरे इस खूबसूरत शहर का जन्म हुआ।

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नैनीताल के पर्यटन स्थलों की सूची या नैनीताल में घूमने की जगह (List of Nainital Tourist Places in Hindi)

नैनीताल में तथा नैनीताल के आस-पास कई खूबसूरत पर्यटन स्थल मौजूद है। यहाँ पर आकर आपको बिल्कुल ऐसा अनुभव होगा जैसे आप स्विट्ज़रलैंड या इटली जैसे बेहद ही खूबसूरत देश में पहुँच गए हैं। ये है नैनीताल में घूमने की कुछ मुख्य जगह –

1. नैनी झील

नैनीताल को झीलों का शहर कहा जाता हैं पहले यहाँ 50 से अधिक झीले हुआ करती थी। हम झीलों की बात कर रहे हो और नैनी झील की बात ना हो ऐसा नहीं हो सकता। नैनी झील नैनीताल की सबसे सुन्दर झील है पुरे देश व दुनिया से लोग इस झील की सुन्दरता देखने के लिए उत्तराखंड आते हैं। हरे-भरे पहाड़ो से भरी इस झील में आप नौकायन का आनंद भी उठा सकते हैं तथा यहाँ के सुहावने मौसम का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं।

इस झील के निर्माण के पीछे एक पुराणिक कहानी जुडी हैं ऐसी मान्यता है कि जब भगवान शंकर माता सती को कैलाश पर्वत के जा रहे थे तब माता सती की बाई आँख यहाँ गिर गयी थी जिसे से इस झील के निर्माण हुआ आँख से झील बनने की मान्यता के कारण ही इस झील का नाम नैनी झील पड़ा।

प्रवेश शुल्क – प्रदत्त (देय). नैनी झील में नौकायन की सुविधा उपलब्ध है। आप एक तय शुल्क जमा करके नाव में पूरी झील घूम सकते हैं या खुद नाव चलाकर नौकायन भी कर सकते हैं।

प्रवेश समय – सुबह 6 से शाम 6 बजे तक

नैनी झील कैसे पहुँचे?
नैनी झील नैनीताल में घूमने की जगह में सबसे प्रसिद्ध है आपको हर स्थान से यहाँ के लिए सवारी मिल जाएगी। तल्लीताल बस स्टैंड से नैनी झील की दूरी मात्र 1.5 किलीमीटर हैं।

2. मॉल रोड

मॉल रोड (जिसे अब गोविंद बल्लभ पन्त मार्ग) के नाम से जाना जाता हैं, नैनीताल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में से एक हैं। इस मार्ग पर आपको भिभिन्न सुन्दर चीजो की दुकाने, मॉल, रेस्टोरेंट, बैंक आदि बड़ी मात्रा में देखने को मिलते हैं। नैनीताल में अलग-अलग प्रकार की सुन्दर मोमबत्तियाँ बनाई जाती हैं जिन्हें आप मॉल रोड पर स्थित दुकानों से खरीद सकते हैं। वैसे तो इस मार्ग पर बहुत भीड़ रहती है लेकिन मई व जून के महीने में वाहनों के आने पर प्रतिबन्ध रहता है तब आप अपने साथी के साथ पैदल पूरी मॉल रोड घूम सकते हैं।

प्रवेश शुल्क – मुफ्त

प्रवेश समय – सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक

मॉल रोड कैसे पहुँचे?
मॉल रोड नैनी झील के बिल्कुल समीप में स्थित है, आप तल्लीताल बस स्टैंड से आराम से यहाँ पहुँच सकते हैं।

3. नैना देवी मंदिर

नैना देवी मंदिर नैनीताल में हिंदुओ की आस्था के सबसे बड़े केंद्र में हैं। यह मंदिर नैनी झील के मल्लीताल क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसा माना जाता है हिन्दू देवी माता सती की आँख यहाँ पर गिरी थी जिस करना नैनी झील बनी थी तथा इस झील के किनारे पर ही नैना देवी मंदिर बनाया गया जहाँ लोग सती देवी की आँखों की कलाक्रति की पूजा करते हैं। इस मंदिर में हर वर्ष 8 दिन के लिए मेला भी लगता है जिसे देखने लोग दुनिया भर से आते हैं।

प्रवेश समय – सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक

प्रवेश शुल्क – मुफ्त

नैना देवी मंदिर कैसे पहुँचे?
नैना देवी मंदिर नैनी झील के एक छोर पर मल्लीताल क्षेत्र में स्थित हैं। यह तल्लीताल बस स्टैंड से मात्र 2.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

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4. इको गुफा पार्क

इको गुफा पार्क पर्यटकों की हमेशा से एक पसंदीदा जगह रही हैं, यहाँ पर देखने के लिए बहुत कुछ हैं। एको पार्क में आपको कई जानवरों की गुफाये देखने को मिलेगी। आप यहाँ पर चीता की गुफा, चमगादड़ गुफा, गिलहरी की गुफा, उड़ने वाली लोमड़ी की गुफा, पैंथर गुफा, तथा बंदरो की गुफा देखे सकते हैं। इन गुफाओ को बिल्कुल प्राकर्तिक रूप में बनाया गया हैं। गुफा के अन्दर रोशनी के लिए पेट्रोलियम लगे हुए हैं, जिनके प्रकाश में गुफा को देखना एक सुखद अनुभव देता हैं। इसके आलावा भी आप चट्टानी गुफाओ, संगीतमय फव्वारे का आनंद उठा सकते हैं।

प्रवेश समय – सुबह 9:30 से शाम 05:30 तक

प्रवेश शुल्क – प्रदत्त (मूल्य पर), यदि आप पार्क में कैमरा ले जाना चाहते है तो आपको अपने प्रवेश शुल्क के साथ कैमरा अन्दर ले जाने की भी 30 रूपये फीस देनी होगी।

कैसे पहुँचे एको गुफा पार्क?
यह पार्क नानितल शहर के मल्लीताल क्षेत्र में स्थित है। मॉल रोड से एको गुफा पार्क की दुरी मात्र 1 किलोमीटर है, जहाँ आप पैदल भी 5 से 10 मिनट में पहुँच सकते हैं।

5. स्नो व्यू पॉइंट

स्नो व्यू पॉइंट देश भर ही नहीं पुरे संसार के पर्यटकों का केंद्र बना रहता हैं। यहाँ पर्यटक हिमालय के खूबसूरत व आकर्षक नज़ारे को देखने के लिए आते है। बर्फ के नज़ारे के इस बिंदु से आप कुछ महत्वपूर्ण चोटियाँ नंदा देवी, त्रिशूल तथा नंदा कोट को देख सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दे नन्दा देवी भारत की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है। 1975 तक सिक्किम की भारत में विलय होने तक नंदा देवी भारत की सबसे ऊँची चोटी थी जिसका स्थान कंचनजंघा चोटी (भारत देश की सबसे ऊँची पर्वत माला) ने ले लिया हैं।

स्नो व्यू पॉइंट पर दूरबीन स्थापित की गयी हैं जिस से पर्यटक हिमालय की सुन्दर पर्वत श्रंख्लायो का बेहतरीन नजारा देख सके। त्रिशूल चोटी तीन पहाड़ो से मिलकर बनी है जो एक त्रिसूल की आक्रति बनाते हैं, स्नो व्यू पॉइंट से इसे देखना भी बड़ा मनमोहक हैं।

प्रवेश शुल्क – मुफ्त

स्नो व्यू पॉइंट कैसे पहुँचे?
यह जगह नैनीताल शहर के तल्लीताल बस स्टैंड से लगभग साड़े तीन किमी० दूर है। मॉल रोड से केबल कार की सहायता से आप शुगमता से स्नो व्यू पॉइंट पहुँच सकते है, यदि आपको पहाड़ो पर बने संकरे रास्तो पर चलने में आनंद आता है तो आप पैदल भी यहाँ पहुँच सकते हैं।

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6. नैनीताल चिड़ियाघर (जी० बी० पन्त हाई अल्टीट्यूड चिड़ियाघर)

नैनीताल चिड़ियाघर उत्तराखंड राज्य का सबसे पुराना चिड़ियाघर माना जाता है क्योंकि उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश से 2000 में अलग होकर एक भिन्न प्रदेश बना था। 2100 मीटर की उचाई पर होने के कारण इसे उच्च उचाईं का चिड़ियाघर कहा जाता हैं। इस चिड़ियाघर का निर्माण नैनीताल के तल्लीताल क्षेत्र में शेर का डंडा पर्वत पर 1984 में किया गया था तथा आप लोगो के लिए इसे 1 जून 1995 में खोला गया था।

ग्यारह एकड़ में बने इस चिड़ियाघर में दुर्लभ जानवर व पक्षी निवास करते हैं। यहाँ पर आपको हिमालयन काला भालू, बंगाल टाइगर, तिब्बती भेड़िया, जापानी लंगूर, भोकने वाला हिरण, पहाड़ी तीतर, तेंदुआ एवं मैदानी गिद्ध आदि भिभिन्न पशु-पक्षी देखने को मिलते हैं।

प्रवेश समय – सुबह 10 बजे से शाम 4:30 तक (प्रत्येक सोमवार व सरकारी छुट्टियों पर बंद रहता हैं)

प्रवेश शुल्क – प्रदत्त (मूल्य पर)

कैसे पहुँचे नैनीताल चिड़ियाघर?
नैनीताल चिड़ियाघर की तल्लीताल बस स्टैंड से दूरी मात्र 2 किलोमीटर है आप वाहन से आसानी से 10 मिनट में व पैदल चलकर 20 मिनट में चिड़ियाघर पहुँच सकते हैं।

7. राजभवन

राजभवन का निर्माण 1897 से 1900 के बीच ब्रिटिश राज में अंग्रेजो द्वारा किया गया था। यहाँ पर अंग्रेजी शासन में गवर्नर व मुख्य अतिथि गर्मियों के समय में निवास किया करते थे। राजभवन को गवर्नर हाउस के नाम से भी जाना जाता हैं अब यहाँ उत्तराखंड के गवर्नर निवास करते हैं।

अगर राजभवन के स्थापत्य की बात करे तो इस बिल्कुल विक्टोरियन स्टाइल में बनाया गया हैं। इस बिशाल भवन में 113 कमरे है जो बड़ी ही उच्च वास्तुकला को प्रदर्शित करते हैं। राजभवन में आपको बहुत सरे फूलो की प्रजातियों से सुशोभित बगीचा, गोल्फ मैदान, स्विमिंग पूल तथा बलूत पेड़ भी देखने को मिलते हैं

प्रवेश समय – सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक (रविवार व सभी राष्ट्रीय अवकाशों पर बंद रहता हैं)

प्रवेश शुल्क – प्रदत्त (मूल्य पर) – 50 रूपये प्रति व्यक्ति टिकट

राजभवन कैसे पहुँचे?
राजभवन या गवर्नर हाउस पहुँचने के लिए आप मॉल रोड से रिक्शा से जा सकते हैं। तल्लीताल बस स्टैंड से राज भवन की दूरी मात्र 3.5 किमी० हैं, आप यहाँ से भी शुगामता से राजभवन पहुँच सकते हैं।

8. नैना चोटी (Naina Peak)

नैना चोटी नैनीताल का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर हैं। नैना शिखर को चाइना पीक (चीन शिखर) व यहाँ के स्थानिय लोगो द्वारा चीना पीक (चीना शिखर) भी कहा जाता हैं। नैना शिखर ट्रैकिंग का शौक रखने वालो के लिए एक बेहद ही बेहतरीन जगह हैं। इस चोटी से आप नैनीताल का खूबसूरत नजारा, हिमालय की पर्वत श्रंखलाये आदि देख सकते हैं।

नैना चोटी पर आप केवल पैदल या मॉल रोड से घोड़े की सवारी करके ही पहुँच सकते हैं। इस शिखर पर जाते वक्त अपने लिए थोड़ा खाने-पीने का सामान ले जाना न भूले। क्योंकि यहाँ जाते वक्त आपको कोई भी खान-पान करने की दुकान नहीं मिलेगी। नैना चोटी पर ट्रैकिंग करते वक्त जूते आरामदायक व हलके पहने जिस से आपको शिखर पर चढ़ने में परेशानी न हो और आपके पैर दर्द न करे।

प्रवेश समय – सुबह 8 बजे से शाम 5:30 तक

प्रवेश शुल्क – मुफ्त

कैसे पहुँचे नैना शिखर?
नैना चोटी या शिखर नैनीताल के तल्लीताल बस स्टैंड से 7 किलोमीटर की दूरी पर हैं। यदि आप नैना झील या मॉल रोड के आस-पास है तो यहाँ से भी नैना शिखर शुगामता से पहुँचा जा सकता हैं। मॉल रोड से नैना चोटी जाने के लिए घोड़े की सवारी की सुविधा भी उपलब्ध हैं।

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9. टिफ़िन टॉप

अयार्पत्ता पर्वत पर बना टिफ़िन टॉप एक बहुत ही खूबसूरत पिकनिक स्थान हैं। टिफ़िन टॉप को “डोरोथी की सीट” के नाम से भी जाना जाता हैं। डोरोथी सीट का निर्माण ब्रिटिश सैन्य ऑफिसर कर्नल जे० पी0 केलेट ने अपनी स्वर्गीय पत्नी डोरोथी केलेट की याद में बनवाया था।

डोरोथी की सीट का टिफ़िन टॉप नाम पड़ने के पीछे बड़ा ही रोचक करण हैं। ट्रेकिंग करने वाले पर्यटक पुरे नैनीताल को देखते हुए डोरोथी की सीट पर जाकर अपना लंच करना पसंद करते थे, इसलिए ही इस जगह का नाम टिफ़िन टॉप पड़ा।

टिफ़िन टॉप से आप नैनीताल का चारो तरफ का नजारा देखा सकते हैं, फोटोग्राफी करने का शौक रखने वाले लोगो के लिए यह एक बहुत ही अच्छा स्थान है, यहाँ से आप नैनीताल, नैनी झील व अन्य कुमाऊ पर्वतो के भी फोटो खीच सकते हैं।

प्रवेश समय – सुबह 8 बजे से शाम 5:30 तक

प्रवेश शुल्क – मुफ्त

कैसे पहुँचे टिफ़िन टॉप?
टिफ़िन टॉप या डोरोथी की सीट पर आप आसानी से तल्लीताल बस स्टैंड से पहुँच सकते हैं यहाँ से इसकी दूरी लगभग 5 किमी० हैं। आप चाहे तो मॉल रोड से टिफ़िन टॉप पर घोड़े की सवारी करके भी जा सकते हैं।

10. केबल कार (Aerial Ropeway)

यदि आप कुछ मिनट में ही नैनीताल का सुन्दर द्रश्य देखना चाहते हैं तो एरियल रोपवे (हवाई रस्सी मार्ग) आपके लिए बहुत अच्छे रहेगा। नैनीताल आने वाले पर्यटकों के लिए केबल कार हमेशा से ही एक आकर्षण का केंद्र रहा हैं। प्रतिदिन सैकड़ो लोग इस केबल कार के द्वारा नैनीताल का व नैनी झील का सुन्दर द्रश्य देखते हैं। आप 3 मिनट से भी कम समय में इस केबल कार के द्वारा नैनीताल की प्रख्यात जगह स्नो व्यू पॉइंट पहुँच जाते हैं। यह केबल कार मल्लीताल से शुरू होकर स्नो व्यू पॉइंट तक जाता हैं।

प्रवेश समय – सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक

प्रवेश शुल्क – प्रदत (मूल्य पर)

कैसे पहुँचे केबल कार तक?
केबल कार या एरियल रोपवे नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में स्थित हैं। आप चाहे तो सीधे मल्लीताल पहुँच सकते हैं या फिर तल्लीताल रोडवेज बस स्टैंड से भी केबल कार तक 2 किमी० की दूरी तय करके पहुँच सकते हैं।

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11. पंगोट (Pangot)

पंगोट नैनीताल से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक सुन्दर गाँव हैं। यदि आप सस्ते में नैनीताल देखना चाहते है तो आप इस गाँव में ठहर सकते हैं यहाँ रुकना आपके लिए नैनीताल में रखने से बहुत कम सस्ता होगा। इस गाँव में आपको बहुत ही शांत वातावरण मिलेगा तथा यहाँ के लिए बहुत ही मेल-जोल वाला स्वाभाव रखते हैं।

पंगोट में आप ट्रेकिंग कर सकते हैं, कैम्पिंग कर सकते हैं, तथा भिभिन्न प्रकार की चिड़ियों की प्रजाति देख सकते हैं। यहाँ पर रात को रूककर आसमान में चमकते तारो को देखना, व अपने पार्टनर के साथ ठंडी रात में जलती हुई लकडियों के पास बैठकर संगीत सुनना बड़ा ही मनोरंजक हैं।

प्रवेश शुल्क – मुफ्त

प्रवेश समय – शाम से पहले पहुँचना पर्यटकों के ठहरने में सुविधा प्रदान करता हैं।

पंगोट कैसे पहुँचे?
पंगोट नैनीताल से मात्र 15 किमी की दूरी पर स्थित है जहाँ पर आप वाहन से आधे घंटे में पहुँच सकते हैं।

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नैनीताल कब जाये? (When to Visit Nainital)

वैसे तो नैनीताल एक ऐसा शहर है जहाँ आप वर्ष के बारह महीने जा सकते हैं। फिर भी यदि आप नैनीताल में मौजूद हर चीज का आनंद उठाना चाहते हैं तो मार्च से जून तक का समय सबसे अच्छा रहता हैं। यह गर्मियों का समय होता हैं लेकिन नैनीताल में तापमान 27 °C का पास ही रहता हैं।

यदि आप बर्फ प्रेमी हैं तो आपको यहाँ दिसम्बर से फरवरी ले बीच आना चाहिए। बर्फ गिरने के बाद यहाँ तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता हैं तथा मौसम भी बेहद सुहावना हो जाता हैं।

जुलाई से सितम्बर यहाँ बरसात का मौसम होता हैं। मै आपको सुझाव दूंगा इस समय आप यहाँ न आये क्योकि बारिश से कभी जमीन धस जाती हैं तो कभी सड़क पर पहाड़ गिरने से रास्ते बंद हो जाते हैं। इसलिए इस समय यहाँ आने का मजा थोड़ा फीका अवश्य हो सकता हैं। यदि आपका बजट कम है तो यह समय आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता हैं एवं बरसात के मौसम में आप मेले का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं।

नैनीताल कैसे पहुँचे? (How to Reach Nainital)

नैनीताल में घूमने की जगह पर शुगमता से सड़क मार्ग द्वारा ही पहुंचा जा सकता हैं। आइये जानते है आप नैनीताल कैसे पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग द्वारा (By Road)

हरिद्वार से नैनीताल की दूरी 300 किलोमीटर है आपको यहाँ से नैनीताल के लिए रोडवेज बसे मिल जाती हैं। दिल्ली, आगरा, कानपूर, हल्द्वानी, लखनऊ, देहरादून एवं बरेली आदि शहरों से भी नैनीताल ले लिए रोडवेज बसे निरंतर आवगमन करती रहती हैं।

वायु मार्ग द्वारा (By Air)

नैनीताल के सबसे करीब हवाई अड्डा पंतनगर है जिसकी नैनीताल से दूरी लगभग 65 किमी० हैं।

रेलमार्ग द्वारा (By Train)

नैनीताल के लिए सीधे कोई रेल सुविधा उपलब्ध नहीं हैं इसलिए आपको हल्द्वानी के काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर आना पड़ेगा, जो नैनीताल से 35 किलोमीटर की दूरी पर हैं। यहाँ से आप नैनीताल के लिए टैक्सी किराये पर कर सकते हैं।

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FAQ (सवाल-जबाब)

सवाल – नैनीताल में कौन सी नदी बहती है?

जबाब – नैनीताल में कोसी, गौला, भाखड़ा, दाबका आदि नदियाँ बहती है। इनमे कोसी सबसे प्रमुख नदी है।

सवाल – नैनीताल झील की गहराई कितनी है?

जबाब – नैनीताल झील की गहराई 27.3 मीटर है।

सवाल – नैनीताल की खोज किसने और कब की?

जबाब – नैनीताल की खोज 18 नवंबर 1841 में ब्रिटिश शुगर व्यापारी पीटर बैरन ने की थी

सवाल – नैनीताल में कितने ताल है?

जबाब – नैनीताल में सात ताल है।

आज हमने क्या जाना?

आज हमने नैनीताल में घूमने की जगह (Nainital Tourist Places in Hindi) के बारे में जाना। नैनीताल के पर्यटन स्थल बहुत ही खूबसूरत है यहाँ हर साल लाखो लोग घूमने के लिए आते हैं। नैनीताल में विदेशी पर्यटकों के आने की तादाद भी हजारों में हैं। आशा करते है आपको नैनीताल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की यह पोस्ट अवश्य पसंद आई होगी।

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