[RAM] रैम क्या है इसका उपयोग क्या हैं | RAM in Hindi

रैम क्या है (RAM Kya Hai), रैम के भिभिन्न प्रकार, इतिहास, कार्य पद्धति (Types of RAM in Hindi, History, SRAM, DRAM, Working Process of RAM in Hindi)

random-access-memory-ram-in-hindi
रैम क्या है – RAM Kya Hai

यदि आप यह लेख पढ़ रहे है तो यह निश्चित है कि किसी मोबाइल,टेबलेट या कंप्यूटर के माध्यम से पढ़ रहे है। आपने कई बार देखा होगा हमार मोबाइल या लैपटॉप हैंग होने लगता हैं। मोबाइल बहुत धीरे चलने लगता है या काम ही करना बंद कर देता है फिर आपको उसे चलाने के लिए स्विच ऑफ करके रीस्टार्ट करना पड़ता हैं। लैपटॉप के हैंग होने पर भी हम कुछ ऐसा ही करते है।

क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है कि हमारा फ़ोन एवं कंप्यूटर हैंग क्यों होते हैं? लैपटॉप एवं मोबाइल के हैंग होने का कारण होता हैं रैम। यह रैम ही है जो आपके मोबाइल को चलाता है। आइये जानते है रैम क्या है (RAM Kya Hai) तथा यह हमारे मोबाइल व लैपटॉप आदि में किस तरह काम करता हैं।

रैम क्या है? (RAM Kya Hai / RAM in Hindi)

रैम हमारे कंप्यूटर या मोबाइल की मैमोरी होती है जो अस्थायी रूप से वर्तमान के लिए आवश्यक डेटा को संग्रिहत (Store) करती हैं।

यहाँ अस्थायी से आशय होता है कि जब तक आपका कंप्यूटर चल रहा है तो रैम में डेटा आता रहता है तथा कंप्यूटर उसको आपके सामने स्क्रीन पर दिखाता रहता है। यदि बिजली चली जाती है या आपका कंप्यूटर किसी अन्य कारणवश द हो जाता है तब आप जिस प्रोजेक्ट आदि पर कार्य कर रहे थे वह नष्ठ हो जाता है।

क्योंकि रैम अस्थायी मैमोरी होती है इसलिए यह लैपटॉप या मोबाइल बंद होने के बाद आप किस सूचना को देख रहे थे या किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे यह याद नहीं रख सकती।

अगर RAM Kya Hai को और भी अधिक साधारण शब्दों में समझे तो रैम किसी भी कम्प्यूटिंग उपकरण का एक हार्डवेयर है जिसमे वर्तमान में ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लीकेशन प्रोग्राम तथा सूचना को रखा जाता है ताकि यह जल्द से जल्द उपकरण के प्रोसेसर तक पहुँच सके। आप अपने मोबाइल में जो एक साथ कई सारी एप्लीकेशन खोल लेते हो ये सभी रैम में ही खुलती हैं। जब आप इन एप्लीकेशन को बंद करते है तो ये वापस मोबाइल की हार्ड मैमोरी में चली जाती हैं।

आशा है रैम क्या है यह बात आपको भली-भांति समझ में आ गयी होगी। यदि आपको अभी भी स्पष्ठ नहीं हुआ हुआ है तो इस लेख को आगे पढ़ते रहे। क्योंकि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे रैम के बारे में हमारे दिमाग में स्पष्ठता आती जाएगी।

रैम का इतिहास (History of RAM in Hindi)

पहली रैम अस्तित्व में सन् 1947 में विलियम्स ट्यूब के रूप में आई थी जिसका निर्माण फ्रेडी विलियम्स तथा टॉम किलबर्न नामक दो वैज्ञानिको ने किया था। यह सबसे पहली रैंडम एक्सेस मैमोरी थी जिसे काफी वर्षो तक कंप्यूटर में उपयोग किया गया था। विलियम्स ट्यूब में एक सीआरटी (कैथोड रे ट्यूब) का उपयोग किया गया था; डेटा को चेहरे पर विद्युत आवेशित स्पॉट के रूप में संग्रहीत किया गया था। उस समय की दुसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मैमोरी मैगनेटिक-कोर मैमोरी थी

रोबर्ट एच. नोर्मन द्वारा सन् 1963 में प्रथम स्टेटिक रैंडम एक्सेस मैमोरी का अविष्कार किया गया था। इस मैमोरी ने ही मैगनेटिक-कोर मैमोरी का स्थान लिए लेकिन इसमें प्रत्येक बिट डेटा स्टोर करने के लिए छ: MOS ट्रांजिस्टर की आवश्यकता थी। SRAM का वाणिज्य उपयोग 1965 में आरम्भ हुआ जब आईबीएम (IBM) ने SP95 नामक चीप बाजार में उतारी।

MOS तकनीक ने ही डायनामिक रैम (DRAM) के निर्माण की दिशा तैयार की। डॉ० रोबर्ट एच डिनार्ड ने MOS पर करते हुए पाया कि इस से कैपासिटर का निर्माण किया जा सकता है। अपनी रिसर्च आगे बढ़ाते हुए डॉ० रोबर्ट ने सिर्फ एक ट्रांजिस्टर के रैम को बनाने में सफलता पाई जिसे डायनमिक रैम कहा गया। पहली वाणिज्य DRAM IC चिप Intel 1103 थी जिसे 1 किलोबिट की क्षमता के साथ 8 µm मोस प्रोसेस पर 1970 में रिलीज़ की गयी थी।

👉 यह भी पढ़े > सैटेलाइट क्या हैं, अमेरिका न अब तक कितनी सैटेलाइट भेजी हैं

रैम की फुल फॉर्म क्या है (RAM Full Form in Hindi)

रैम (RAM) की फुल फॉर्म Random Access Memory होती हैं।

शायद आपको रैम का पूरा नाम पहले ही पता हो पर क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि इसे रैंडम एक्सेस मैमोरी ही क्यों कहते है?

रैम को रैंडम एक्सेस मैमोरी इसलिए कहते है क्योंकि यह लैपटॉप या मोबाइल की ऐसी मैमोरी होती है जो डेटा को पढ़ने के साथ में उसमे बदलाब भी कर सकती है मतलब यह कुछ भी रैंडमली एक्सेस कर सकती हैं।

रैम कैसे कार्य करती है (Working Process of RAM in Hindi)

जैसे की हम जानते है कि रैम एक प्रकार की मैमोरी होती है तो यह काम भी एक मैमोरी (स्मृति) की तरह ही करती है। जैसे इंसानों की स्मृति या याददाश्त सूचना को कही से सुनती है या देखती है उसी प्रकार रैम मैमोरी भी सूचना को कही ओर से लाती है तथा आपको वह डेटा या सूचना प्रदान कराती है।

इंसानों की एवं रैम मैमोरी में जो सबसे बड़ा फर्क होते है वह है याद रखने की क्षमता। यदि आज आपने कोई काम किया एवं आप रात में सो गए तो सुबह उठकर आपको याद रहेगा कि आपने कल कौन सा काम किया था। लेकिन रैम मैमोरी के साथ ऐसा नहीं है, कुछ कार्य करते हुए यदि आप बीच में ही लैपटॉप आदि को बंद कर देते है तो द्वारा लैपटॉप चलाने पर वह सारा काम आपको फिर से करना पड़ेगा।

क्योंकि रैम सिर्फ डिवाइस के चालू रहने तक ही कार्य हो रहा है इसे याद कर सकती है। इसलिए ही हम कंप्यूटर पर कोई प्रोजेक्ट आदि करते हुए उसे किसी फोल्डर में सुरक्षित कर देते है ताकि कंप्यूटर बंद होने पर हमारा किया हुआ सभी काम शुरू से ना हो जाये।

आइये इस उदहारण से समझते है रैम कैसे काम करती है? मान लो आप एक कार्यालय में मेज पर बैठे काम कर रहे है जिस पर कई फाइल रही है। आपको एक फाइल की जरुरत होती है जो किसी अन्य कमरे में राखी हुई है। आप दुसरे कक्ष में जाते है एवं उस फाइल को उठाकर के लेट है एवं अपनी डेस्क पर रेख देते है। आपकी मेज पर पहले ही 4 फाइले रखी हुई थी, आपने 5वी फाइल भी रेख दी।

काम करते हुए ऐसा समय आता है जब आपको और अधिक काम करने के लिए 6 फाइलो की और आवश्यकता है लेकिन आपकी मेज पर तो अन्य फाइल रखने का स्थान ही नहीं है। परन्तु आप फिर भी वो सभी फाइल मेज पर रख देते है, इस कारण आपकी मेज पर अधिक लोड हो जाता है।

बिल्कुल इसी तरह रैम काम करती है रैम भी एक मेज के जैसे ही है। जैसे मेज पर खुद से कोई फाइल राखी होती उसी तरह रैम में कोई भी डाटा स्टोर नहीं होता। जब हम लैपटॉप एवं मोबाइल में किसी एप्लीकेशन या फाइल को खोलते है तो रैम सबसे पहले उस एप्लीकेशन के डेटा या फाइल को डिवाइस की स्टोरेज मैमोरी से लाती है तथा आपके सामने खोल देती है। एप्लीकेशन एवं फाइल के बंद हो जाने पर रैम सारा डाटा आपके उपकरण की स्टोरेज मैमोरी में वापस पहुँचा देता है।

यह तो उसी प्रकार हुआ ना जैसे आप फाइल लाकर मेज पर रखते है एवं काम हो जाने पर वापस उन्हें उनकी जगह पर रख देते है। रैम भी आपके मांगने पर डेटा लेता है एवं उपकरण बंद करने पर इसे वापस कर देता है।

आशा है अब आपको रैम कैसे कार्य करती है यह अच्छी प्रकार से पता चल गया होगा। आइये जानते है रैम कितने प्रकार की होती है।

👉 यह भी पढ़े > वेब सर्वर क्या है, इसके उपयोग क्या हैं?

रैम के प्रकार (Types of RAM in Hindi)

रैम के प्रकारों की बात करे तो इसके मुख्यतः तीन प्रकार होते है

i. Static RAM (जिसे SRAM के नाम से भी जाना जाता है। )
ii. Dynamic RAM (जिसे DRAM के नाम से भी जाना जाता है। )
iii. Flash Memory

इस पैराग्राफ में हम सिर्फ स्टेटिक रैम (स्थिर रैम) एवं डायनामिक रैम (गतिशील रैम) के बारे में बात करेंगे। फ़्लैश मैमोरी वही मैमोरी होती है जिसे अधिकतर प्रिंटर, मैमोरी कार्ड, यूएसबी फ़्लैश ड्राइव, पोर्टेबल मीडिया प्लेयर्स तथा बिजली से चलने वाले छोटे खिलौनो में प्रयोग किया जाता है।

i . स्टेटिक रैम (SRAM)

स्टेटिक रैम या SRAM का पूरा नाम स्टेटिक रैंडम एक्सेस मैमोरी (Static Random Access Memory) होता है। स्टेटिक रैम में डेटा तभी तक स्टोर रहता है जब तक लैपटॉप या मोबाइल चलते रहते है। कुछ ऐसी स्टेटिक रैम भी आती है जिनमे जानकारी पॉवर बंद होने के बाद भी सुरक्षित रहती है, ऐसी मैमोरी को नॉन-वोलेटाइल स्टेटिक मैमोरी कहा जाता है।

स्टेटिक रैम की विशेषताएँ (Characterstics of SRAM) –

स्टेटिक रैम की कुछ विशेषताएं निम्नलिखित है –

  • इसका उपयोग CPU (Central Processing Unit) में कैश मैमोरी के रूप में किया जाता है।
  • इसका सूचना को एक्सेस करने में समय कम लगता है इसलिए इसकी गति बहुत तेज होती है।
  • स्टेटिक रैम को डेटा को सुरक्षित रखने के लिए लगातार पॉवर सप्लाई की आवश्यकता होती है इसी कारण यह उर्जा की खपत अधिक करती है।
  • अन्य मैमोरी की तरह इसमें भी सैल होते है जिनमे छ: ट्रांजिस्टर होते है।

स्टेटिक रैम के लाभ (Advantages of Static RAM in Hindi)

स्टेटिक रैम के कई लाभ है जिनमे से कुछ नीचे प्रस्तुत किये गए है –

  • SRAM को इस्तेमाल करना बहुत ही साधारण एवं आसान है।
  • यह एक विश्वसनीय मैमोरी है इसलिए ही इसे कैश मैमोरी के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।
  • महंगी होने के बाबजूद भी इसे इसकी बेहतर एक्सेस स्पीड के कारण पसंद किया जाता है।

स्टेटिक मैमोरी की हानि (Disadvantages of SRAM in Hindi)

SRAM को इस्तेमाल करने की निम्नलिखित हानि होती है –

  • इसकी गति तो अधिक है लेकिन इसे बनाने में खर्चा अधिक आता है इसलिए यह अधिक दाम में मिलती है।
  • इसमें डेटा स्टोर करने के लिए कम स्थान होता है इसलिए यह कंप्यूटर आदि में अधिक स्थान घेरती है।
  • बिजली चले जाने पर या कंप्यूटर के बंद हो जाने पर सम्पूर्ण डेटा खो जाता है।
  • इसका निर्माण करना काफी कठिन है क्योंकि इसका डिजाईन काफी अनसुलझा होता है।

ii. डायनामिक रैम या गतिशील रैम (DRAM)

डायनामिक या गतिशील मैमोरी का पूरा नाम डायनामिक रैंडम एक्सेस मैमोरी (Dayanamic Random Access Memory) होता है। इस मैमोरी में ऐसा सैल होता है जो ट्रांजिस्टर (Transistor) एवं कैपासिटर (Capacitor) की सहायता से बना होता है। प्रत्येक विशिष्ट संधारित्र डेटा के विभिन्न बिट्स को संग्रहीत करता है जो एक सर्किट में एकीकृत होते हैं।

डायनामिक रैम में डेटा कैपासिटर में सुरक्षित होती है, तथा कैपासिटर का यह गुण होता है कि ये पॉवर सप्लाई के बाबजूद बंद होते रहते है। इसी बजह से जानकारी मिलीसेकंड में खत्म होती रहती है, यही कारण है डायनामिक रैम को बार-बार रिफ्रेश करने की जरुरत पड़ती है।

डायनामिक रैम की विशेषता (Characterstics of DRAM in Hindi)

डायनामिक रैम की अनेक विशेषताएँ है जो इसे स्टेटिक रैम से भिन्न बनाती है। आइये डालते है नजर डायनामिक रैम की कुछ विशेषताओ पर –

  • DRAM में बिजली की खपत SRAM के मुकाबले काफी कम होती है।
  • इसे कम स्थान की आवश्यकता होती है।
  • यह डेटा को जल्दी एक्सेस करती है फिर भी यह स्टेटिक रैम से धीमी होती है।
  • डायनामिक रैम के सस्ते होने के कारण ही इसे आजकल कंप्यूटर की मैमोरी में इस्तेमाल किया जाता है

डायनामिक रैम के लाभ (Advantages of DRAM in Hindi)

डायनामिक रैम के फायदे निम्नलिखित है –

  • स्टेटिक मैमोरी के मुकाबले डायनामिक सस्ती होती है।
  • क्योंकि DRAM में सिर्फ एक ट्रांजिस्टर प्रयोग किया जाता है, जिस बजह से इसका डिजाईन बहुत ही साधारण होता है।
  • इसमें अधिक डेटा स्टोर होने के लिए ज्यादा स्थान होता है।

डायनामिक रैम की हानि (Disadvantages of DRAM in Hindi)

डायनामिक रैम के उपयोग की निम्नलिखित हानि हो सकती है –

  • DRAM का निर्माण करना बहुत ही मुश्किल होता है।
  • SRAM से इसकी डेटा को एक्सेस करने की गति कम होती है।
  • लगातार रिफ्रेश करने की आवश्यकता होती है।
  • लगातार रिफ्रेश करने के कारण इसका डेटा नष्ठ होता रहता है।

👉 यह भी पढ़े > ग्रुप टेक्नोलॉजी क्या हैं, क्यों सबको पता होना चाहिए इसके बारे में

SRAM एवं DRAM के बीच असमानताएँ

ये दोनों रैम के ही भाग है लेकिन इनमे काफी भिन्नता है। स्टेटिक रैम एवं डायनामिक रैम में असमानताए जानने के लिए नीचे दी गयी सारणी को ध्यान से पढ़े।

स्टेटिक रैम (SRAM) डायनामिक रैम (DRAM)
• स्टेटिक रैम (SRAM) के उत्पादन में खर्चा ज्यादा आता है• डायनामिक रैम के उत्पादन में खर्चा SRAM बनाने से कम आता है।
• लेवल 1 तथा लेवल 2 माइक्रोप्रोसेसर कैचे का उपयोग करती है• मुख्य मैमोरी का उपयोग करती है
• SRAM में बिजली की खपत कम होती है• इसके उपयोग में बिजली की खपत अधिक होती है।
• फाइल को एक्सेस करने की गति अधिक होती है• फाइल को बहुत धीरे से एक्सेस कर पाती है
• यदि पॉवर बंद हो जाये तो सभी डेटा खो जाता है• इसमें भी पॉवर बंद हो जाने पर सभी डेटा खो जाता है।
• स्टेटिक मैमोरी CPU Cache, हार्ड ड्राइव बफर आदि में अधिक उपयोग होती है• विडियो ग्राफ़िक मैमोरी तथा सिस्टम मैमोरी आदि में ज्यादा इस्तेमाल होता है।

रैम की विशेषताएँ (Features of RAM in Hindi)

रैम की कई विशेषताए है जो इसे अन्य मैमोरी की तुलना में एक अलग स्थान प्राप्त कराती है। आइये डालते है रैम की विशेषताओ पर एक नजर –

  • रैम एक ऐसी मैमोरी होती है जिसमे सूचना सिर्फ थोड़े समय के लिए स्टोर रह सकती है। पॉवर के चले जाने पर सारा डेटा डिलीट हो जाता है।
  • रैम के निर्माण में अन्य कंप्यूटिंग उपकरण मैमोरी के मुकाबले अधिक खर्चा आता है।
  • सीपीयू (CPU) का काम RAM से सूचना को लाकर प्रोसेस करना हैं।
  • रैम की प्रोसेस करने के गति एनी अन्य मैमोरी से अधिक होती है।
  • सभी तरह के प्रोग्राम, एप्लीकेशन आदि इसे में खुलती है।
  • जब आप अपने कंप्यूटर या मोबाइल में किसी फाइल को एक्सेस करना चाहते है तो रैम ही उस फाइल को स्टोरेज में से लाकर ओपन करती है।

RAM तथा ROM के बीच अंतर (Difference of RAM and ROM in Hindi)

जैसे की आप जानते ही है रैम (RAM) एवं रोम (ROM) दोनों कंप्यूटर या फ़ोन की मैमोरी के रूप में कार्य करती है। दोनों का काम तो सूचना को स्टोर करना होता है लेकिन इनकी कार्य पद्धति बहुत अलग है। इन दोनों के बीच अंतर को जानने के लिए नीचे दी गयी सारणी पर एक नजर डालिए।

रैम (Random Access Memory) रोम (Read Only Memory)
• RAM का पूरा नाम Random Access Memory होता है।• ROM का पूरा नाम Read Only Memory होता है।
• RAM में डेटा पॉवर ऑफ होने तक ही सुरक्षित रहता है।• ROM में डेटा पॉवर ऑफ होने के बाद भी सुरक्षित रहता है।
• रैम में डेटा को स्टोर करने की क्षमता अधिक होती है• रोम में डेरा को स्टोर करने की क्षमता रैम से बहुत कम होती है।
• रैम में स्टोर की गयी सूचना को कोई भी बदल सकता है।• रोम में स्टोर सूचना को बदला नहीं जा सकता, सिर्फ इसे बनाने वाली कंपनी ही इसमें बदलाव कर सकती है।
• यह एक उच्च गति की मैमोरी होती है• रोम की गति रैम के मुकाबले कम होती है।
• रैम में सुरक्षित सूचना को सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) द्वारा एक्सेस किया जा सकता है।• CPU रोम में सुरक्षित डेटा को तब तक एक्सेस नहीं कर सकता जब तक यह रैम में स्टोर न हो जाये।
• रैम एक महंगी मैमोरी है।• रैम के मुकाबले रोम मैमोरी सस्ती होती है।
• सुरक्षित जानकारी को रैम द्वारा पढ़ा भी जा सकता है एवं उसे परिवर्तन भी किया जा सकता है।• सुरक्षित जानकारी को रैम द्वारा सिर्फ पढ़ा जा सकता है।
• यह केवल अस्थायी समय के लिए डेटा को सुरक्षित रक सकती है।• यह डेटा को स्थायी समय के लिए डेटा को सुरक्षित रख सकती है।

हम उम्मीद करते है इस सारणी को पढ़ कर रैम एवं रोम में विभिन्नता के बारे आपको पूरी तरह से स्पष्ठता आ गयी होगी।

👉 यह भी पढ़े > कैप्चा को भरने का इससे आसान तरीका नहीं हैं

बिना अपग्रेड करे मैं अपने कंप्यूटर एवं मोबाइल की रैम (RAM) कैसे बढ़ा सकता हूँ?

यदि आपके पास कम रैम वाला कंप्यूटर या मोबाइल है तो निश्चित ही आप इसकी धीमी परफॉरमेंस से परेशान हो गए होंगे। आपको 4GB तथा इससे कम रैम वाले कंप्यूटर में यह समस्या बहुत हद तक देखें को मिलेगी।

अपग्रेड करके कंप्यूटर की रैम को अधिकतर बढ़ाया जाता है। हो सकता है आप अपने उपकरण को अपग्रेड नहीं करना चाहते हो तथा फिर भी उसकी रैम बढ़ाना चाहते हो तो हमारे पास आपके लिए एक तरीका है। आइये जानते है बिना अपग्रेड करे कंप्यूटर या मोबाइल की रैम कैसे बढ़ाये।

A. प्रोग्राम बंद करके

क्या आप जानते है लैपटॉप या मोबाइल में प्रोग्राम खुलने पर वह रैम में ही खुलते है? यही कारण होता है कि अधिक एप्लीकेशन खोलने पर आपका मोबाइल या कंप्यूटर हैंग होने लगता है। हमारी कंप्यूटिंग डिवाइस में ऐसे कई प्रोग्राम या एप्लीकेशन इनस्टॉल रहती है जो हमारे किसी काम की नहीं होती या उनका हम कभी उपयोग नहीं करते।

सबसे पहले आपको ऐसी एप्लीकेशन या प्रोग्राम को ढूँढना है तथा उसके बाद उन्हें कंप्यूटर से अनइनस्टॉल करके डिलीट कर देता है। ऐसा करने से आपकी काफी मैमोरी खली हो जायगी एवं आपका मोबाइल आदि अच्छी तरह से चलने लगेगा। आप चाहे तो रैम को खाली रखने के लिए किसी पेन ड्राइव या अन्य मैमोरी में डेटा को स्टोर करके अलग रख सकते है।

B. स्लीप मोड का उपयोग

आपने अपने मोबाइल में स्लीप मोड का विकल्प अवश्य देखा होगा पर शायद इसका उपयोग न किया हो। स्लीप मोड इस्तेमाल में लाने पर आपके लैपटॉप या मोबाइल के बैकग्राउंड में चल रहे प्रोग्राम एवं एप्लीकेशन बंद हो जाते है। जिससे होता यह है कि आपका उपकरण सिर्फ एक समय पर एक ही एप्लीकेशन को इस्तेमाल करता है जिस कारण आपके कंप्यूटर की परफॉरमेंस बेहतर हो जाती है।

आप मोबाइल में दिए गए एप्लीकेशन स्लीप मोड को उपयोग कर सकते है। अगर बात कंप्यूटर आदि की करे तो कई एंटीवायरस स्लीप मोड की सुविधा प्रदान करते है जिस से आपके बेकार में चल रहे प्रोग्राम बंद हो जाते है।

रैम खरीदते वक्त किस बात का ध्यान रखना चाहिए?

अगर आप रैम खरीदने की योजना बना रहे है तो सबसे पहले आपको इस पर ध्यान देना है कि आप अपने कंप्यूटर में काम कौन-सा करने वाले है। हो सकता है आप केवल मनोरंजन के लिए कंप्यूटर प्रयोग करते है तो आप कोई भी सामान्य मैमोरी ले सकते है। यदि आप प्रोग्रामिंग तथा एडिटिंग करते है तो आपको कम से कम 3000 MHz वाली रैम खरीदनी चाहिए।

गेम खेलने वालो के लिए MHz तो महत्वपूर्ण है ही साथ में लेटेंसी (latency) पर भी बहुत ध्यान देना पड़ता है। यदि आप गेम खेलने के शौक़ीन है, प्रोग्रामिंग करते है या एडिटिंग करते है तो आप 4000 MHz के साथ CAS 15 से 18 लेटेंसी की रैम वाले ले सकते है। गेमर्स यदि इस से भी बेहतर गुणबत्ता की रैम के लिए जाये तो उन्हें गेम में अधिक बेहतर परफॉरमेंस देखने को मिलेगी।

👉 क्या आपने यह पोस्ट पढ़ी > साइबर सुरक्षा क्या है कैसे बचाती है यह आपकी हर गुप्त जानकारी चोरी होने से

हमे कितने रैम (RAM) वाले लैपटॉप को खरीदना चाहिए?

लैपटॉप या मोबाइल खरीदते समय जो सबसे पहली बात हमारे दिमाग में रहती है वो है रैम। हमारे लैपटॉप एवं मोबाइल की रैम जितनी बढ़िया होगी, हमे उतने ही अच्छे परिणाम देखने को मिलेगे। क्या आप जानते है, रैम जितनी अधिक होगी हमारे लैपटॉप या मोबाइल उतने ही कम हैंग होंगे।

आजकल 2 GB रैम वाले मोबाइल एवं लैपटॉप को बहुत ही थोड़े लोग खरीदते है और इतनी रैम वाले उपकरणों को खरीदना भी नहीं चाहिए। आइये बात करते है 4 GB, 8GB तथा 16GB से अधिक रैम वाली डिवाइस के बारे में –

4 जीबी रैम – इतने जीबी की रैम वाले लैपटॉप उन्हें ही लेने चाहिए जो सिर्फ इन्टरनेट आदि चलाने का काम करते है या थोड़े बहुत ऑफिस के कार्य और फोटो एडिटिंग आदि करते है। 4 GB रैम के मोबाइल में गेम खेले जा सकते है मगर आपका अनुभव अधिक अच्छा नहीं रहेगा।

8 जीबी रैम – सामान्य विडियो एडिटिंग करने वाले एवं कम स्पेस घेरने वाले गेम खेलने के लिए आप 8 GB रैम के लैपटॉप का उपयोग कर सकते है। इतने जीबी की रैम के मोबाइल भारी कार्यो एवं गेमिंग के लिए बहुत अच्छे मने जाते है।

16+ जीबी रैम – कुछ कार्य ऐसे होते होते है जिन्हें कम जीबी के लैपटॉप में करना मुमकिन नहीं है। यदि आप विडियो एडिटिंग करते है, बहुत अधिक गेम खेलते है तथा प्रोग्रामिंग आदि भी करते तो 16 GB या इससे अधिक रैम वाले लैपटॉप को खरीदना बहुत ही बढ़िया रहेगा। इतनी मैमोरी के लैपटॉप तेज चलते है एवं उनमे हैंग होने की समस्या भी कम ही देखी जाती है।

Note : लैपटॉप या मोबाइल खरीदते समय सिर्फ रैम ही पैमाना रखना ठीक नहीं है। आपको रैम के आलावा भी प्रोसेसर, लेटेंसी, बैटरी बैकअप आदि को भी ध्यान में रखकर लैपटॉप या मोबाइल खरीदने के लिए जाना चाहिए।

FAQ (रैम के बारे में सवाल-जबाब)

कंप्यूटर में रैम क्या है?

कंप्यूटर में रैम एक मुख्य मैमोरी होती है जिसका काम कंप्यूटर की सेकेंडरी मैमोरी (हार्ड ड्राइव आदि) से सूचना को प्रोसेस करके उपयोगकर्ता को पहुचाना होता है। जब आप कंप्यूटर में कोई भी प्रोग्राम खोलते है तो वह रैम में ही खुलता है।

रैम और रोम क्या होती है?

रैम और रोम कंप्यूटर की मैमोरी होती है जहाँ रैम के पूरा नाम रैंडम एक्सेस मैमोरी तथा रोम का पूरा नाम रीड ओनली मैमोरी होता है। रैम एक अस्थायी मैमोरी होती है जबकि रोम एक स्थायी मैमोरी होती है।

रैंडम एक्सेस मेमोरी की हिंदी क्या है?

रैंडम एक्सेस मैमोरी (RAM) को हिंदी में यादृच्छिक-अभिगम स्मृति (याभिस्मृति) कहते है।

अस्थाई मेमोरी कौन सी है?

रैम (RAM) जिसे रैंडम एक्सेस मेमोरी कहा जाता है एक अस्थायी मैमोरी के रूप माँ कार्य करती है। रैम को अस्थायी मैमोरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें सूचना कुछ समय के लिए सुरक्षित रहती है।

आज हमने क्या जाना?

आज हमने RAM in Hindi के इस आर्टिकल में रैम क्या है (RAM Kya Hai) इस बारे में विस्तार से चर्चा की। हमने रैम के साथ में RAM Full Form in Hindi, Types of RAM in Hindi, SRAM, DRAM, What is SRAM & DRAM in Hindi आदि के बारे में भी गहराई से जाना।

आशा करते है कि आपको रैम के बारे में काफी जानकारी मिल गयी होगी, अन्य कोई सूचना प्राप्त करने के लिए कमेंट में बताना न भूले।

ये पोस्ट भी पढ़े

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *