राजा व प्रमुख लोगो के महल में प्रवेश करने पर ढोलो से स्वागत किया जाता था

ये ढोल आज भी आमेर के किले में रखे है जिन्हें "स्वागत ढोल" के नाम से जाना जाता है

आमेर किले की छतों व दीवारों पर कई जगह सोने से पेंट किया गया है.

राजा मानसिंह के कमरे से उनकी 12 रानियों  के लिए बने अलग-अलग कमरों तक एक खुफ़िया रास्ता जाता हैं. जिसके  बारे में सिर्फ राजा को पता था रानियों को नहीं.

मान सिंह महल के सभी नौकर व गार्ड ट्रांसजेंडर होते थे.

सन 1975 तक महल में मंदिर के सामने भैंसे व बकरों की बलि दी जाती थी, जिस पर भारत सरकार द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया.

प्रतिबन्ध के बाद भी  बलि देने का सिलसिला कई सालों तक चलता रहा था.

पहले रानियाँ इतने अधिक गहने पहनती थी कि बजन के कारण उनका चलना तक मुश्किल होता है. इसलिए रानी के घूमने के लिए व्हीलचेयर बनायीं गयी थी जो आज भी महल में रखी हुई है.

17 वी शताब्दी में महाराजा जय सिंह द्वितीय ने केशर के मुल्य को देखते हुए  आमेर किले में केशर की खेती करने की कोशिश की थी. लेकिन केशर ठण्ड में होता है तथा राजस्थान एक गर्म क्षेत्र है.

आमेर किले में भूल-भुलैयां तथा जोधा अकबर जैसी बॉलीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है.

Credit -imdb.com

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